गंगापुत्र निगमानंद ने गंगा को बचाने का बीड़ा उठाया था लेकिन गंगापुत्र नें गंगा नगरी में ही दम तोड़ दिया गुमनामी की मौत मारा गया गंगापुत्र.......चलिए आपको बताते हैं कि आखिरकार गंगापुत्र था कौन.. इनका पूरा नाम निगमानंद सरस्वती था....गंगा के किनारे चल रहे क्रेशरों को बंद करवाने को लेकर 68 दिनों से अनशन पर बैठे थे निगमानंद...उन्होने गंगा को बचाने की मुहिम छेड़ रखी थी 19 फरवरी को गंगा के किनारे चलने वाले क्रेशरों के खिलाफ निगमानंद नें अनशन शुरू कर दिया था 68 दिनों तक अनशन जारी रहा संत की हालत बिगडी और उन्हे अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसके बाद वो कोमा में चले गए....लेकिन किसी ने भी संत की सुध नहीं ली और 74 वें दिन संत ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया आश्रम के लोगों का कहना है कि निगमानंद को जहर देकर मारा गया है जबकि पौस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं हुई है----पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद भी निगमानंद के समर्थक उनकी मौत के लिए डॉक्टरों और खनन माफिया पर मिलीभगत कर जहर देने का आरोप लगा रहे हैं संतों के आरोपों और बढते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार नें मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी है.....वहीं अब संत की मौत पर सियासत भी शुरू हो गई है, रामदेव के मसले पर चुप्पी साधे रखने वाली कांग्रेस नें निगमानंद की मौत को लेकर राज्य सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है...निगमानंद की मौत कैसे हुई ..क्या उन्हे वाकई जहर देकर मारा गया ...या फिर उनकी मौत की असल वजह अनशन ही था .. ये वो सवाल हैं जिनका जवाब आने में अभी थोड़ा वक्त लग सकता है,, और जब तक संत कि मौत की सही वजह पता नहीं चलती ना जाने ऐसे कितने सवाल उठते रहेंगे----
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