हरिद्वार, गंगा रक्षा को लेकर अनशन के दौरान दम तोड़ने वाले स्वामी निगमानंद के पार्थिव शरीर को गुरुवार की शाम उनके आश्रम मातृ सदन में भू-समाधि दे दी गई। इससे पहले पार्थिव शरीर पर अधिकार को लेकर स्वामी निगमानंद के परिवार और संत समाज में खींचतान चलती रही। दोनों पक्ष कुछ देर के लिए धरने पर भी बैठे। प्रशासन का फैसला अंतत: संत समाज के पक्ष में गया। मातृ सदन के स्वामी निगमानंद गंगा में खनन को लेकर चार माह से अनशन पर थे। चार दिन पहले उनका देहांत हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को लेकर मातृ सदन और परिजन आमने-सामने थे। बुधवार दोपहर बाद शुरू हुए इस विवाद में कई उतार-चढ़ाव आए। गुरुवार सुबह करीब सात बजे स्वामी निगमानंद उर्फ स्वरूपम कुमार के पिता प्रकाश चंद झा, मां कल्पना झा, चाचा सुभाष झा, भाई सत्यम कुमार, अनुपम झा, अमित कुमार, मामा लखन कुमार मातृ सदन पहुंचे। उन्होंने करीब एक घंटे तक पार्थिव शरीर के दर्शन किए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें आश्रम से बाहर कर दिया। संतों-परिजनों में नोक-झोंक पार्थिव शरीर पर अधिकार जताने और सुपुर्दगी की मांग को लेकर परिजन आश्रम के सामने धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि वे निगमानंद का सनातनी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। दोपहर तक आश्रम के बाहर परिजन अपनी मांग पर अड़े थे, तो मातृसदन परिसर में निगमानंद को भू-समाधि देने की तैयारियां शुरू हो गई। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। एसडीएम हरवीर सिंह ने वहां दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन हल नहीं निकला। मातृ सदन पहुंची डीएम डॉ. आर मीनाक्षीसुंदरम और एसएसपी केवल खुराना ने मौके पर आकर परिजनों और मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती से अलग-अलग बातचीत की। इस दरम्यान कई मर्तबा परिजनों और संतों के बीच नोक-झोंक भी हुई। कोर्ट जाएंगे परिजन मामला पेंचीदा होता देख जिला प्रशासन ने अखाड़ों के साथ ही विधिक राय भी ली। अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के मंत्री हरिगिरि महाराज और हंसदेवाचार्य ने संन्यास परंपरा का हवाला देते हुए निगमानंद को भू-समाधि देने पर सहमति जताई। जिला शासकीय अधिवक्ता (दीवानी) संजीव कौशल ने भी शव पर मातृ सदन का अधिकार होने का मशविरा दिया। अपराह्न करीब तीन बजे प्रशासन ने रायशुमारी के दोनों पत्र निगमानंद के परिजनों को सौंप कर पार्थिव शरीर मातृ सदन को ही सौंपने का फैसला सुनाया। इस पर परिजन वहां से चले गए। निगमानंद के चाचा सुभाष चंद ने बताया कि इस मामले को लेकर वे कोर्ट जाएंगे। सुरक्षा घेरे में मातृ सदन भू-समाधि की तैयारियों के बीच मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ गए।
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