देहरादून, भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए)में ड्रिल स्क्वायर पर तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की मौजूदगी में जोशीले कदम, एक साथ उठते हाथ और गर्व से तना सीना यह बताने के लिए काफी था कि भारतीय सेना को मिलने वाले 546 जांबाजों के हाथ में सरहदें महफूज हैं। आइएमए के दीक्षांत परेड में अंतिम पग पार करने के बाद 563 कैड्टस सेना में अधिकारी बन गए। इनमें 17 युवा अधिकारी मित्र देशों के थे। शनिवार को आईएमए में 128 वें रेग्यूलर व सहयोगी कोर्स की पासिंग आउट परेड की निरीक्षण अधिकारी राष्ट्रपति ने कैड्टस को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीक के दौर में युद्ध की प्रकृति भी बदल रही है। ऐसे में सेना को चुस्त होने के साथ ही ज्ञान युग की चुनौतियां का सामना करने के लिए तैयार होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों में आ रहे बदलाव से आगाह किया। राष्ट्रपति ने कैडेट्स से अपने आचरण को ऊंचा व बेदाग बनाकर दूसरे के लिए उदाहरण पेश करने का आहवान किया।
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