देहरादून, रक्षा मंत्रालय के लेह-लद्दाख रोड प्रोजेक्ट में करोड़ों के घोटाले के मामले में उत्तर प्रदेश कैडर के आइएएस सदाकांत से सीबीआइ ने शुक्रवार को लगभग 6 घटे पूछताछ की। माना जा रहा है कि सीबीआइ जल्द उनकी गिरफ्तारी कर सकती है। सीबीआइ ने लेह-लद्दाख रोड प्रोजेक्ट में घोटाले का खुलासा बीती 13 अक्टूबर को देहरादून में एनपीसीसी के सब ऑफिस में छापा मारकर किया था। सीबीआइ ने ज्वाइंट जोनल मैनेजर एसके शर्मा को 15 लाख की रिश्वत लेते दबोचा था। पड़ताल के बाद सीबीआइ ने एनपीसीसी हेडक्वार्टर फरीदाबाद के जीएम जेके सिन्हा, उसके गाजियाबाद निवासी भाई एसके सिन्हा व हैदराबाद की कैटेबल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. के एमडी एमवी रॉव, सीपीडब्ल्यूडी नई दिल्ली के अधिशासी अभियंता राकेशबाबू गर्ग समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में चौकाने वाला पहलू पिछले माह सामने आया, जब यूपी कैडर के आइएएस अधिकारी सदाकांत का नाम भी घोटाले में जुड़ा। जौनपुर निवासी सदाकांत को वर्ष 2007 में प्रतिनियुक्ति पर केंद्र भेजा गया था। सदाकांत गृह मंत्रालय के बार्डर रोड मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में संयुक्त सचिव थे। सीबीआइ सूत्रों के मुताबिक लेह-लद्दाख रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी रक्षा मंत्रालय की गोपनीय सूचनाओं को सदाकांत ने सार्वजनिक कर प्राइवेट कंपनियों के ठेकेदारो को अनुचित लाभ पहुंचाया थ। खुलासे के बाद केंद्र ने सदाकांत को वापस यूपी भेज दिया, जबकि उनकी प्रतिनियुक्ति 2012 तक थी। लौटने के बाद वह छुट्टी पर चले गए। सीबीआइ तभी से सदाकांत की तलाश कर रही थी। उन्हें पूछताछ को देहरादून बुलाया गया था।शुक्रवार को सदाकांत देहरादून सीबीआइ कार्यालय पहुंचे। यहां करीब छह घंटे तक उनसे पूछताछ की गई। सदाकांत के निजी कंपनी के ठेकेदारों, एनपीसीसी अफसरो से रिश्तों की पड़ताल की गई। गोपनीय सूचना सार्वजनिक करने की एवज में उन्हें कितनी रिश्वत दी गई थी, इस संबंध में सीबीआइ की अलग-अलग टीमों ने उन्हें टटोलकर अहम सबूत जुटाए। सदाकांत को देहरादून में रोका गया है। माना जा रहा है कि उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है। एसपी सीबीआइ नीलाभ किशोर का कहना है कि पूछताछ चल रही है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी
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