नई दिल्ली। उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव का साढ़े सात माह तक इंतजार करने के बाद केंद्र सरकार ने अब खुद ही गोमुख से उत्तरकाशी तक भगीरथी के बहाव वाले इलाके को ‘इको संवेदनशील क्षेत्र’ घोषित करने की पहल शुरू कर दी है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयराम रमेश ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को अधिसूचना के मसौदे के साथ पत्र भेजकर 60 दिनों में राय मांगी है।
जयराम के अनुसार उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री निशंक को पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं मिला। पिछले साल एक नवंबर को राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण की बैठक में गोमुख से उत्तरकाशी तक के 135 किमी क्षेत्र को ‘इको संवेदनशील क्षेत्र’ घोषित करने का फैसला हुआ था। लेकिन तब से कई बार याद दिलाने पर भी राज्य सरकार ने कोई पहल नहीं की। इसलिए अब केंद्र सरकार मसौदा भेज रही है। मंत्रालय ने आम लोगों से भी राय मांगी है। केंद्र के मसौदे के अनुसार भगीरथी के 135 किमी बहाव क्षेत्र में 25 मेगावाट या इससे ज्यादा क्षमता की जल विद्युत परियोजनाएं नहीं लग सकेंगी। पानी का औद्योगिक कार्य के लिए उपयोग नहीं हो सकेगा। इन क्षेत्र में सड़कें बनाने अथवा चौड़ाई बढ़ाने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी जरूरी होगी।
No comments:
Post a Comment