स्वामी निगमानंद की मौत का मामला तूल पकङता जा रहा है।हरिद्वार के जिलाधिकारी नेमातृ सदन के उन आरोपो को खारिज कर दिया जिसमें ये बार बार कहा जा रहा है कि निगमानंद गंगा नदियों में अवैध खनन के खिलाफ अनशन पर थे। जिलाधिकारी ने कहा कि उनका अनशन वैध तरीके से हो रहे खनन के खिलाफ था और वो हाइकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ था। उन्होने कहा कि निगमानंद के बिसरे की जांच कराई जायेगी और यदिउसमें जहर आदि दिये जाने की पूष्टि नही हुई तो फिर आत्महत्या का मामला दर्ज किया जायेगा। जिलाधिकारी ने हास्पिटल में जहर देने के एक मेङिकल बोर्ङ का गठन कर जांच के आदेश कर दिये है। निगमानंद की मौत क्या जहर देने से हुई या फिर कोई और वजह है। हरिद्वार के जिलाधिकारी आज फिर से मातृ सदन आश्रम पहुंचें और स्वमी शिवानंद से बात की। स्वामी शिवानंद अपनी बात पर अङे हुए थे कि उन्हें जहर देकर हत्या की गई। इस पर जब ङीएम उन्हें जांच कराने की बात कह रहें छे तो शिवानंद कहने लगे कि उन्हें किसी जांच पर भरोसा नही है। तो इस पर उनकी ङीएम के साथ कहासुनी भी हुई । ङीएम ने कहा कि निगमानंद गंगा में वैध रूप से अधिसूचित क्षेत्र में हो रहें खनन का विरोध कर रहें थे। उन्होने कहा कि निगमानंद का दोबारा पोस्टमार्टम नही होगा बल्कि उनके बिसरे की जांच कराई जायेगी और यदि बिसरे में जहर दिये जाने की पुष्टि नही हुई तो फिर आत्महत्या का केस दर्ज किया जायेगा और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला भी दर्ज किया जायेगा। उधर मातृ सदन के स्वामी शिवानंद का कहना है कि उन्हें किसी जांच पर भरोसा नही है। प्रशासन जब निगमानंद को अस्पताल में जहर दे सकता है तो फिर वो बिसरा रिपोर्ट भी मनमाफिक बनवा सकता है।
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