हरिद्वार, खानपुर थानाक्षेत्र में पुत्री के प्रेमी को गोली मारकर हत्या करने वाले आरोपी को सत्र न्यायाधीश राम सिंह ने उम्र कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि ग्राम सिकंदरपुर, खानपुर निवासी राजेंद्र का बेटा सेवक कुमार का गांव के ही बाबूराम पुत्र सुक्कड़ की पुत्री से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसके चलते बाबूराम ने पांच दिसंबर 2008 को दोपहर के समय ग्राम राजपुर के पास सेवक कुमार को गोली मार दी थी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के संबंध में मृतक सेवक कुमार के पिता राजेंद्र ने बाबूराम के खिलाफ खानपुर थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मृतक सेवक राम की जेब से वोटर कार्ड के अलावा बाबूराम की पुत्री का फोटो भी बरामद किया था। पुलिस ने बाबूराम को 21 दिसंबर 2008 को गोवर्धनपुर बस स्टैंड के पास से पकड़ा था और उसकी निशानदेही पर सेवक कुमार की हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया था। मुकदमे में वादी पक्ष की ओर से 11 गवाहों राजेंद्र, ईश्वर पाल, राजबल, लेखराज, डॉ. मांगेराम, उपनिरीक्षक रणवीर सिंह, शांति कुमार, केपी टम्टा, राजेंद्र सिंह, कांस्टेबल कुंवर सिंह और राजवीर के बयान कराये गये। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश राम सिंह ने बाबूराम को सेवक कुमार की हत्या करने का दोषी पाया। न्यायालय ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्र कैद एवं दस हजार रुपये जुर्माने की तथा आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत तीन वर्ष की सश्रम कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि ग्राम सिकंदरपुर, खानपुर निवासी राजेंद्र का बेटा सेवक कुमार का गांव के ही बाबूराम पुत्र सुक्कड़ की पुत्री से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसके चलते बाबूराम ने पांच दिसंबर 2008 को दोपहर के समय ग्राम राजपुर के पास सेवक कुमार को गोली मार दी थी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के संबंध में मृतक सेवक कुमार के पिता राजेंद्र ने बाबूराम के खिलाफ खानपुर थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मृतक सेवक राम की जेब से वोटर कार्ड के अलावा बाबूराम की पुत्री का फोटो भी बरामद किया था। पुलिस ने बाबूराम को 21 दिसंबर 2008 को गोवर्धनपुर बस स्टैंड के पास से पकड़ा था और उसकी निशानदेही पर सेवक कुमार की हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया था। मुकदमे में वादी पक्ष की ओर से 11 गवाहों राजेंद्र, ईश्वर पाल, राजबल, लेखराज, डॉ. मांगेराम, उपनिरीक्षक रणवीर सिंह, शांति कुमार, केपी टम्टा, राजेंद्र सिंह, कांस्टेबल कुंवर सिंह और राजवीर के बयान कराये गये। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश राम सिंह ने बाबूराम को सेवक कुमार की हत्या करने का दोषी पाया। न्यायालय ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्र कैद एवं दस हजार रुपये जुर्माने की तथा आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत तीन वर्ष की सश्रम कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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