नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत की पत्नी श्रीमती दीप्ति रावत की सहसपुर में भूमि विवाद संबंधी शिकायत के मामले में दून के तत्कालीन एसएसपी अभिनव कुमार गुरुवार को लोकायुक्त के समक्ष पेश हुए। इस मामले में आज सुनवाई पूरी होने के बाद लोकायुक्त ने फैसला सुरक्षित रखा है।
श्रीमती दीप्ती रावत ने उक्त भूमि विवाद पर तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान में मुख्यमंत्री के अपर सचिव अभिनव कुमार की भूमिका पर आपत्ति जताई थी। इससे पहले बीती चार अगस्त को सुनवाई के दौरान लोकायुक्त जस्टिस एमएम घिल्डियाल ने पुलिस और प्रशासन के स्तर पर की कार्यवाही के तर्क को नाकाफी माना। शिकायतकर्ता की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने तत्कालीन एसएसपी की रिपोर्ट को अवैधानिक करार दिया। उन्होंने शंकरपुर स्थित जमीन की पहली मालकिन से जुड़े साक्ष्य लोकायुक्त के समक्ष रखने को कहा। गौरतलब है कि सहसपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव में श्रीमती रावत के नाम तकरीबन 100 बीघा जमीन पर स्थानीय निवासी मोहम्मद हसन ने अपना दावा करते हुए जमीन पर कब्जा जमाने का आरोप लगाया था। इस मामले में तत्कालीन पुलिस-प्रशासन के स्तर पर की गई कार्यवाही को अवैधानिक करार देते हुए श्रीमती रावत ने लोकायुक्त में दस्तक दी थी।
श्रीमती दीप्ती रावत ने उक्त भूमि विवाद पर तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान में मुख्यमंत्री के अपर सचिव अभिनव कुमार की भूमिका पर आपत्ति जताई थी। इससे पहले बीती चार अगस्त को सुनवाई के दौरान लोकायुक्त जस्टिस एमएम घिल्डियाल ने पुलिस और प्रशासन के स्तर पर की कार्यवाही के तर्क को नाकाफी माना। शिकायतकर्ता की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने तत्कालीन एसएसपी की रिपोर्ट को अवैधानिक करार दिया। उन्होंने शंकरपुर स्थित जमीन की पहली मालकिन से जुड़े साक्ष्य लोकायुक्त के समक्ष रखने को कहा। गौरतलब है कि सहसपुर थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव में श्रीमती रावत के नाम तकरीबन 100 बीघा जमीन पर स्थानीय निवासी मोहम्मद हसन ने अपना दावा करते हुए जमीन पर कब्जा जमाने का आरोप लगाया था। इस मामले में तत्कालीन पुलिस-प्रशासन के स्तर पर की गई कार्यवाही को अवैधानिक करार देते हुए श्रीमती रावत ने लोकायुक्त में दस्तक दी थी।
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