Thursday, 26 May 2011

सदाकांत की गिरफ्तारी जल्द

लेह-लद्दाख में करीब दो सौ करोड़ के सड़क निर्माण में हुए घोटाले में सीबीआइ ने जांच का दायरा बढ़ा लिया है। आइएएस सदाकांत का नाम भी मुकदमे में जुड़ने के बाद सीबीआइ ने आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। सीबीआइ सूत्रों की मानें तो अगले एक-दो दिन में आइएएस सदाकांत की गिरफ्तारी संभव है। सीबीआइ की एक टीम ने जौनपुर में भी डेरा डाला हुआ है। सूत्रों की मानें तो सदाकांत व नेशनल प्रोजेक्ट ऑफ कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनपीसीसी) के जीएम ने ही कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ मिलकर पूरी डील को तय कराया था। सदाकांत पर यह भी आरोप है कि जौनपुर में मंदिर निर्माण के लिए कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारियों से ही दान दिलवाया था। क्या था मामला 13 अक्टूबर 2010 को सीबीआइ ने एनपीसीसी के देहरादून सब-ऑफिस के ज्वाइंट जोनल मैनेजर एसके शर्मा को पन्द्रह लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। भारी बारिश के कारण लेह-लद्दाख में सड़कें बह गई और हजारों किलोमीटर का हाइवे क्षतिग्रस्त हो गए थे। सुरक्षा की दृष्टि से संवदेनशील इन सड़कों को बनाने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने दो सौ करोड़ के सड़क निर्माण का कार्य निविदा पर दिया। इसके निरीक्षण का जिम्मा नेशनल प्रोजेक्ट ऑफ कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन देहरादून के पास था। सीबीआइ को सुराग मिले कि निर्माण कार्य में बड़ा घोटाला किया जा रहा है। इसमें एसके शर्मा का नाम सामने आया। इस पर एसके शर्मा को पन्द्रह लाख की रिश्वत के साथ देहरादून ऑफिस में गिरफ्तार किया गया। रिश्वत देने वाले तीन एजेंटों को भी पकड़ा गया। कब कौन गिरफ्तार 14 अक्टूबर को सीबीआइ ने एनपीसीसी हेडक्वार्टर में तैनात जीएम जेके सिन्हा एवं उसके भाई एसके सिन्हा को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। जेएम सिन्हा के भाई एसके सिन्हा के मकान से सीबीआइ ने 45 लाख रुपए कैश बरामद किए थे। सीबीआइ के मुताबिक जेएम सिन्हा पूरे मामले का मास्टरमाइंड था। जेएम सिन्हा ने हैदराबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक एमजी रॉव को लेह-लद्दाख में निर्माण कार्यो का ठेका दिलवाया था। इसके लिए एमजी रॉव को सत्रह करोड़ रुपए एडवांस भी दिए। इसी का कमीशन एनपीसीसी के अफसरों को भेजा जा रहा था। 21 अक्टूबर को सीबीआइ ने घोटाले में 85 लाख रुपए घूस लेने के आरोपी सीपीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता राकेश बाबू गर्ग को धर दबोच लिया।

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