देहरादून। तीर्थनगरी हरिद्वार और कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी को सरकार ने नगर निगम बना दिया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। दोनों जगह के निर्वाचित नगर निकाय बोर्ड भंग कर दिए गए हैं। संबंधित जिलाधिकारियों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शनिवार को यह घोषणा की।
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद पहली बार नए नगर निगम बनाए गए हैं। अब प्रदेश में नगर निगमों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। दोनों शहरों को नगर निगम का दर्जा देने के लिए साल भर से कसरत चल रही थी। यूपी के जमाने में पांच लाख की आबादी पर नगर निगम बनाने की व्यवस्था थी। बीजेपी सरकार ने कुछ समय पहले ही मानकों में बदलाव कर निकायों के अपग्रेड होने का रास्ता खोला। मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में नगर निगम, पालिका और नगर पंचायतों के गठन के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में डेढ़ लाख और पर्वतीय क्षेत्र में एक लाख की आबादी पर नगर निगम बनाया जा सकता है। हरिद्वार की आबादी ढाई लाख को पार कर गई है, जबकि हल्द्वानी में दो लाख से ज्यादा की आबादी है।
सीएम ने सचिवालय में पत्रकारों को बताया कि नए दोनों निकायों का दर्जा बढ़ने से लोगों को मिलने वाली सहूलियतें बढ़ जाएंगी। अवस्थापना विकास के लिए ज्यादा बजट मिलेगा। केंद्र सरकार की तमाम ऐसी योजनाएं हैं, जोकि नगर निगम के लिए ही अनुमन्य हैं, उनका लाभ इन शहरों को मिलेगा। कहा कि सरकार का इरादा शहरों की सूरत बदलने का है। इसलिए शहरों में अवस्थापना विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, अब तुरंत ही निकाय क्षेत्र के सीमांकन, लोगों के सुझाव, आपत्ति आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद वार्डों और नगर निगमों का आकार स्पष्ट हो पाएगा।
सरकार की कोशिश है कि वहां सारी औपचारिकताएं पूरी कर चुनाव कराए जाएं। हरिद्वार और हल्द्वानी को नगर निगम घोषित किए जाने के बाद अब सरकार की यह भी कोशिश है कि कार्यकाल खत्म होने से पहले वह सारी औपचारिकताएं पूरी कर ले। ताकि, विधानसभा चुनाव में इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रदर्शित कर सके।
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