Sunday, 29 May 2011

कितना काला धन, पता लगाएगी सरकार

नई दिल्ली। काले धन का पता लगाने के लिए बढ़ते दबाव के बीच केंद्र ने रविवार को घोषणा की कि वह देश-विदेश में जमा काले धन के आकलन और इससे जुड़े पहलुओं का अध्ययन करा रहा है। वित्त मंत्रालय द्वारा शुरू काम 16 माह में पूरा किया जाएगा। देश के तीन शीर्ष संस्थान इस काम को अंजाम दे रहे हैं। ये संस्थान यह भी बताएंगे कि मनी लांड्रिंग के लिए क्या तरीके अपनाए जाते हैं, काले धन की वजह क्या है और किन-किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा काली कमाई की जा रही है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस तरह का कोई पुख्ता अनुमान उपलब्ध नहीं है कि देश और देश के बाहर कितना काला धन है। अध्ययन में यह भी बताया जाएगा कि किस तरह काले धन को पकड़ा जाए और उस पर अंकुश लगाते हुए उसे किस तरह टैक्स के दायरे में लाया जाए। नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकानॉमिक रिसर्च (एनसीईएआर), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पालिसी (एनआईपीएफपी)और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (एनआईएफएम) द्वारा मार्च से यह अध्ययन किया जा रहा है। काले धन पर सबसे पहला अध्ययन करीब 26 साल पहले 1985 में एनआईपीएफपी ने किया था। मंत्रालय ने कहा कि यह अनुमान विश्वसनीय नहीं है कि काले धन का आंकड़ा 462 अरब डॉलर से 1400 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है। काला धन मामले में सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाई है, जो ऐसे धन को जब्त करने उसे राष्ट्रीय संपदा घोषित करने का का कानूनी ढांचा सुझाएगी। समिति में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष भी शामिल होंगे। गौरतलब है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कुछ समय पूर्व कहा था कि सरकार काले धन से निपटने और विदेशों में जमा धन का पता लगाने के लिए पांच स्तरीय योजना पर काम कर रही है।

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