हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद फिर बहाल हो गई है। श्रीमहंत ज्ञानदास ने बृहस्पतिवार को अखाड़ा परिषद भंग करते हुए अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद की घोषणा की थी। शनिवार को वैष्णव अखाड़ा परिषद का प्रस्ताव वापस लेते हुए भंग परिषद को पुन: बहाल कर दिया और एक बार फिर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बन बैठे।
ज्ञानदास ने संन्यासियों के जिन तीन अखाड़ों को अलग किया था, उनकी बैठक शुक्रवार देर रात से शनिवार सवेरे तक चली। जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरि, अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत कैलाशानंद ब्रह्मचारी तथा आवाहन अखाड़े के शिवशंकर गिरि ने ज्ञानदास के साथ दूरभाष पर लंबी मंत्रणा की। उधर, जिन तीन बैरागी अणियों को साथ लेकर ज्ञानदास अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद की घोषणा किए थे, उनके श्रीमहंतों ने ज्ञानदास से किनारा कर लिया। निर्वाणी अणी के श्रीमहंत धर्मदास, दिगंबर अणी के श्रीमहंत केशवदास एवं निर्मोही अणी के श्रीमहंत राजेंद्रदास ने तीन अखाड़ों की वैष्णव अखाड़ा परिषद को अमान्य कर दिया। वार्ता के बाद श्रीमहंत ज्ञानदास ने परिषद के प्रस्ताव को वापस ले लिया औैर खुद को अध्यक्ष घोषित कर दिया।
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