सरकार के दावे दमदार नहीं
उत्तराखंड की सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भले ही तमाम तरह की योजनाएं चलाने के दावे करें लेकिन सरकार के ये दावे दमदार दिखाई नहीं दे रहे हैं। गंगोलीहाट इलाके के स्कूल टीचर्स की कमी से जूझ रहे हैं। इलाके के ज्यादातर स्कूलों की एक ही कहानी है। छात्र-छात्राओं के अनुपात में टीचरों की संख्या बेहद कम है। गंगोलीहाट और बेरीनाग के कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय है जहां पर एक-एक टीचर के सहारे ही स्कूल चलाया जा रहा है जबकि कुछ स्कूल तो टीचर बगैर सुने पड़े हैं। गंगोलीहाट और बेरीनाग ब्लाॅक में प्राथमिक विद्यालयों की कुल तादात 313 है। इन स्कूलों में टीचरों के डेढ सौ पद खाली पड़े हैं। जबकि इलाके में 67 जूनियर हाईस्कूूल हैं, जिनमें 40 जूनियर टीचर्स के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा 27 हाईस्कूलों में 135 पद खाली पड़े हैं। साथ ही 29 इंटर काॅलेजों में 103 प्रवक्ताओं के पद खाली है। आंकड़ों से साफ पता चलता है कि स्कूलों में पद तो हैं लेकिन इन्हें भरने के लिए सरकार की मंशा साफ नहीं लगती है। एक तरफ सूबे में पढ़े लिखे काबिल युवा नौकरी के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे है, उधर पद होते हुए भी इन्हें भरने में शिक्षा महकमा लाचार है।
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