
गुड़गांव। सेना के जवानों ने 86 घंटे बाद मासूम माही को बोरवेल से बाहर निकाल लिया लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गई। गुड़गांव के सीएमओ ने माही को मृत घोषित किया। बोरवेल से निकलने के बाद माही को एंबुलेंस से गुड़गांव के ईएसआई अस्पताल में ले जाया गया जहा डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। माही को जैसे ही सेना के जवान लेकर ऊपर आए तुरंत ही माही को ईएसआई अस्पताल की पहले से मौजूद एंबुलेंस से उसे अस्पताल ले जाया गया। माही के साथ जाने वालों में सेना के जवान डाक्टर और उसकी मां भी शामिल है। माही के बाहर निकालने से पहले ही यहां के ईएसआई अस्पताल को हाईअलर्ट पर रखा गया था। चार वर्ष की माही बुधवार को साठ फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। अगले दिन से ही सेना और प्रशासन बच्ची को बोरवेल से निकालने में जुटा था। बोरवेल में गिरी माही तक पहुंचने में रुकावट बनी विशाल चंट्टान को तोड़ने में शनिवार रात करीब 12.30 बजे सैन्यकर्मियों को सफलता मिली। इस बीच बच्ची के शरीर में कोई हरकत न दिखने से राहत कार्य में लगे लोगों की धड़कनें तेज हो गई थी। शनिवार को सेना के साथ रैपिड मेट्रो एवं दिल्ली रेल मेट्रो कॉरपोरेशन के इंजीनियरों ने मोर्चा संभाला था। इसके बाद मेट्रो कर्मियों को सुरंग में उतारा गया। मेट्रो इंजीनियर माही तक पहुंचने के लिए आधुनिक संयंत्र, जीपीएस सहित अन्य तकनीक का उपयोग कर बच्ची की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में जुटे रहे। इससे पूर्व सेना के जवान सुरंग में चट्टान आने के कारण माही तक नहीं पहुंच पाए। उनका कहना था कि वे माही के करीब तक पहुंचे पर बीच में आए चट्टान को काटने में हुई दिक्कत से अधिक समय लगा। इस बीच, माही प्रकरण में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हरियाणा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कहा है कि सरकार इसका पता लगाए कि क्या यह घटना किसी लापरवाही का नतीजा है। राज्य के मुख्य सचिव को लिखे पत्र के माध्यम से आयोग ने यह जानना चाहा है कि इस केस में बोरवेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन हुआ कि नहीं। साथ ही यह भी जानना चाहा है कि राज्य सरकार ने बोरवेल को लेकर नियम कानून की अवहेलना करने वालों के खिलाफ में क्या कोई कार्रवाई की। आयोग ने राज्य सरकार से 70 फीट के बोरवेल खोदने व उसे खुला छोड़ देने के परिस्थितियों व तथ्यों पर भी रिपोर्ट तलब किया है। माही मामले से जुड़े बोरवेल व उसके भूमि मालिक और घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने राज्य सरकार से 10 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा है।