Thursday, 28 May 2015

हरिद्वार में प्रशासन की मिलीभगत के बाण गंगा में खनन


हरिद्वार के बाण इलाके में खुलेआम खनन हो रहा है। मौके की पड़ताल करने पर पता चला कि बाण गंगा से पत्थर और रेत उठाकर पहले तो स्टोक सेंटर पर पहुंचाया जाता है। स्टोक सेंटर से बाद में इस पत्थर और रेत को पास ही में चल रहे स्टोन क्रशर पर पहुंचा दिया जाता है। इस तरह से इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा है। अब आपको इस पूरे गोरखधंधे के बारे में तफ्शील से बताते हैं। कहने को तो बाण गंगा में खनन पर पूरी तरह से पाबंदी है। मगर इसके बावजूद भी खनन जारी है। स्टोन क्रशर पर भंडारण की अनुमति से ज्यादा सामान मौजूद है। प्रशासन छापेमारी करता है। स्टोन क्रशर पर जुर्माना भी लगाया जाता है। मगर इसके बाद भी ये स्टोन क्रशर बंद नहीं हुए हैं। अब भी बाण गंगा में खुलेआम क्रशर चल रहे हैं और ये क्रशर वाले खुलेआम ही बाण गंगा से पत्थर और रेत ट्रॉलियों और डंपर के जरिए मंगवा रहे हैं जो कि पूरी तरह से अवैध है। इलाके के गांव के लोग कुछ मुनाफे के चक्कर में अपनी बुग्गी और ट्रैक्टर ट्रॉली से गंगा से पत्थर और रेत भरकर पहले तो स्टोक सेंटर पर पहुंचाते हैं। स्टोक सेंटर वाले इनसे 13 से 16 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पत्थर और रेत खरीदते हैं। स्टोक सेंटर से ही सारा माल स्टोन क्रशर पर पहुंचाया जाता है। स्टोक सेंटर वाले स्टोन क्रशर से 22 से 25 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पत्थर और रेत खरीदते हैं। इतना ही नहीं अगर कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली वाला गंगा से पत्थर और रेत भरकर सीधे स्टोन क्रशर में पहुंचाना चाहे तो इसके लिए भी कोई मनाही नहीं है। गांव वालों की माने बाण गंगा में चल रहे है गणेश स्टोन पर तो खुलेआम बाण गंगा से खनन सामग्री आ रही है। इतना ही हीं नहीं इन्होंने बाण गंगा में अवैध रूप से काफी ज़मीन पर भी कब्जा कर लिया है। एक तरफ हरीश रावत सरकार अवैध खनन पर रोक लगाने का दावा करती है। मगर खननमाफिया पर किसी सरकारी फरमान का कोई फर्क नहीं पड़ता है।

बाबा रामदेव के फूड पार्क के बाहर बवाल, एक की मौत


योग गुरु बाबा रामदेव से जुड़े प्रतिष्ठान पतंजलि हर्बल एंड फूड पार्क के उत्पादों की ढुलाई के ठेके को लेकर पार्क सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय ट्रक यूनियन के सदस्यों के बीच बुधवार को जमकर बवाल हुआ। लाठी-डंडे और पथराव के साथ ही फायरिंग में ट्रक यूनियन के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि दस लोग घायल हो गए। सुरक्षा कर्मियों पर धारदार हथियार से भी हमला करने का आरोप यूनियन पदाधिकारियों ने लगाया। पुलिस ने बाबा रामदेव के भाई राम भरत सहित चार सुरक्षा गाडरें को हिरासत में लिया है। फूड पार्क का प्रबंधन राम भरत के पास है।

Monday, 14 April 2014


.....स्पेशल स्टोरी......... अमरनाथ यात्रा के लिए ज़रूरी बातें, अमरनाथ यात्रा के लिए जारी है रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, अमरनाथ यात्रा 28 जून से शुरु होने जा रही है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चल रही है। रजिस्ट्रेशन फॉर्म इस www.shriamarnathjishrine.com पर उबलब्ध है। वेबसाइट से रजिस्ट्रेशन और हेल्थ सर्टिफिकेट फॉर्म डाउनलोड करने के बाद उसे भरना होगा। हेल्थ सर्टिफिकेट भी सिर्फ चुनिंदा अस्पतालों से बन रहा है। ज्यादातर जगह पर वैसे सरकारी जिला अस्पताल से ही हेल्थ सर्टिफिकेट बन रहा है। श्राईन बोर्ड की वेबसाइट पर दिया गया है कि किस अस्पतास से हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाना है। हेल्थ सर्टिफिकेट को देखकर ही बैंक रजिस्ट्रेशन करेगा। हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अलग अलग अस्पतालों द्वारा निर्धारित फीस ली जा रही है। हरिद्वार के जिला अस्पताल में एक व्यक्ति के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट की फीस करीब 750 रुपए है। डॉक्टर आंखों का टेस्ट, ब्लड ग्रुप टेस्ट, ईजीसी, एक्स-रे जैसे टेस्ट करने के बाद ही हेल्थ सर्टिफिकेट बना रहे हैं। हेल्थ सर्टिफिकेट बनने के बाद आपको अमरनाथ श्राईन बोर्ड की वेबसाइट पर दिए गए बैंक में जाकर यात्रा के लिए निर्धारित की गई 50 रुपए फीस के जमा कराने होंगे। उसी वक्त आपसे यात्रा के तारीख भी पूछी जाएगी। जो लोग एक साथ यात्रा करना चाहते हैं कृपया एक साथ ही सभी रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कराएं। कैसे पहुंचें अमरनाथ पवित्र हिमलिंग के दर्शन के लिए अमरनाथ गुफा की यात्रा दो मार्गो से की जा सकती है। पहला मार्ग पहलगाम से शुरू होता है और दूसरा बालटाल से। तीर्थयात्री देश के विभिन्न हिस्सों से यात्रा के इन दोनों प्रस्थान बिंदुओं तक रेल, सड़क व हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग : अमरनाथ यात्रा के लिए अंतिम रेलवे स्टेशन जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू है। जम्मू का देश के लगभग सभी हिस्सों से रेल संपर्क है। यात्री जम्मू पहुंचकर वहां से आगे पहलगाम या बालटाल तक की यात्रा बस से पूरी कर सकते हैं। जम्मू मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध है और यात्री अमरनाथ यात्रा करने से पूर्व या उसके बाद जम्मू के प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर व अन्य मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। हवाई मार्ग : अमरनाथ यात्रा के लिए निकटतम हवाई अड्डा जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर है। यहां के लिए प्रमुख सरकारी व गैर सरकारी विमानन कंपनियों की हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। यात्री दिल्ली से यहां तक हवाई सेवा के माध्यम से पहुंचकर पहलगाम तक का 96 किमी का सफर सड़क मार्ग से तय कर सकते हैं। सड़क मार्ग : सड़क मार्ग उन यात्रियों के लिए उचित है, जो पंजाब व हिमाचल प्रदेश जैसे नजदीकी राज्यों के हैं। यात्री राज्य परिवहन निगमों की बसों से जम्मू तक पहुंच सकते हैं और आगे पहलगाम का 315 किमी का सफर जम्मू-कश्मीर में उपलब्ध वाहनों बस या कार से तय किया जा सकता है। निजी वाहन से चलने वाले पहलगाम या बालटाल तक सीधे पहुंच सकते हैं। यात्री बस के माध्यम से न्यूनतम 130 और अधिकतम 220 रुपये [डीलक्स बस] किराया खर्च कर पहलगाम तक पहुंच सकते हैं। टैक्सी का किराया 360 से 520 रुपये प्रति यात्री तक है। इसी प्रकार बालटाल तक बस का किराया 160 से 270 रुपये तक और टैक्सी का किराया 550 से 760 रुपये तक है। पहलगाम व बालटाल से आगे-: अमरनाथ यात्रा शुरू करने के लिए दो मार्ग हैं। पहलगाम मार्ग व बालटाल मार्ग। पहलगाम तक पहुंचने के बाद यात्री चंदनबाड़ी, शेषनाग, पंजतरणी होते हुए अमरनाथ पहुंचते हैं। पहलगाम से 16 किमी दूर स्थित चंदनबाड़ी तक मिनी बस की सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके बाद 34 किमी का सफर पैदल तय कर गुफा तक पहुंचा जा सकता है। इनमें चंदनबाड़ी से पिस्सू टाप तक 3 किमी का रास्ता है। पिस्सू टाप से शेषनाग तक 11 किमी का रास्ता है। शेषनाग से 4.6 किमी पर महागुण और यहां से 9.6 किमी पर पंजतरणी है। पंजतरणी से 3 किमी की दूरी तय कर संगम पहुंचते हैं। संगम वह जगह है, जहां बालटाल पड़ाव से चलने वाले यात्री भी आगे की यात्रा के लिए इस मार्ग पर आकर मिल जाते हैं। इसके बाद आगे तीन किमी का सफर और तय करके पवित्र गुफा तक पहुंच जाते हैं। यात्रा का दूसरा प्रस्थान बिंदु बालटाल है। यहां तक जम्मू से 400 किमी का सफर खूबसूरत वादियों के बीच तय करके पहुंचा जाता है। यहां से बरास्ता दोमेल पवित्र गुफा का रास्ता सिर्फ 14 किमी है, पर यह रास्ता पहले मार्ग की तुलना में दुष्कर और उतार-चढ़ाव भरा है। यात्रा के साधन : दोनों प्रारंभिक पड़ावों से गुफा तक का सफर शारीरिक साम‌र्थ्य के अनुसार पैदल, खच्चर या डांडी के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। पहलगाम मार्ग से चंदनबाड़ी से गुफा तक का कुली का खर्चा 1100 रुपये, डांडी का 7000 और खच्चर का 2300 रुपये है। बालटाल मार्ग से यही किराए क्रमश: 700, 3500 व 1100 रुपये है। यह किराए जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा निर्धारित हैं और यात्री इसमें मोल-भाव कर सकते हैं।

Sunday, 16 June 2013

उत्तरकाशी में कितना नुकसान


उत्तरकाशी में कितना नुकसान उत्तरकाशी में करीब 18 हजार यात्री विभिन्न पड़ावों पर फंसे घांघरिया से आधा किमी दूर लक्ष्मण नदी का पैदल पुल बहा हरिद्वार के चंद्राचार्य चौक पर जलभराव में फंसा ट्रैक्टर। •हेमकुंड साहिब में दो, घांघरियां में छह हजार यात्री फंसे •हेमकुंड जा रहे क्रिकेटर हरभजन भी जोशीमठ में फंसे •बदरीनाथ राजमार्ग तीस मीटर बहा, 10 हजार लोग फंसे •दून-दिल्ली हाईवे पर थमे पहिए, गढ़वाल में 123 मार्ग बंद

उत्तराखंड में बारिश का कहर


उत्तराखंड में भारी आपदा, उत्तरकाशी में कुदरत का कहर, उफान पर असीगंगा, कई रोड आपदा की भेंट चढे, कई दर्जन मकान पानी में बहे, दर्जनभर जेसीबी मशीन पानी में बही, आपदा की वजह से चार धाम यात्रा रूकी, जगह जगह फंसे चार धाम यात्री, पूरा हरिद्वार जिला बाढ की चपेट में, इलाके के कई दर्जन गांव में घुसा बाढ का पानी, किसानो की सैकडों एकड फसल हुई जलमग्न, कई गांवों से संपर्क कटा धनौल्टी में बादल फटा, कई गांवों में घुसा पहाड का मलबा, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में बारी बारिश की चेतावनी, उत्तरकाशी और रूद्रप्रयाग सबसे प्रभावित इलाका

उत्तरकाशी प्रभावित को राहत शिविरों में भेजा


उत्तरकाशी: असीगंगा व भागीरथी के जलप्रवाह को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दोनो नदियों के तटवर्ती हिस्सों से अस्सी परिवारों को राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया है। राहत व बचाव के लिए आइटीबीपी व सेना की भी मदद ली जा रही है। लगातार बारिश से दोनों नदियों का पानी बढ़ जाने से उत्तरकाशी में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने नगर क्षेत्र व आस पास के स्कूल कॉलेजों का उपयोग कर 12 राहत शिविर स्थापित कर दिए हैं। खतरे की जद में आई तिलोथ कॉलोनी, बाल्मीकि बस्ती व उजेली क्षेत्र से 80 परिवारों को इन शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया है। लोगों से नदी के तटवर्ती क्षेत्र में न जाने की भी अपील की जा रही है। जिलाधिकारी डॉ.आर राजेश कुमार ने बताया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और राहत शिविरों में लोगों की मदद के लिए पर्याप्त साधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उत्तराखंड में लगातार बारिश, भूस्‍खलन से भारी तबाही, हरभजन भी फंसे


उत्तराखंड में भारी बारिश होने व कई जगह जमीन खिसकने से बड़ी तबाही हुई है. इस प्राकृतिक आपदा की वजह से अब तक 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 25 हजार लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. क्रिकेटर हरभजन सिंह भी जोशीमठ में ही फंसे हुए हैं. अपने परिवार के साथ उत्तराखंड के हेमकुंड साहब गए हरभजन सिंह को भी भारी बारिश के प्रकोप का सामना करना पड़ा. हरभजन सिंह ने फिलहाल जोशीमठ के ITBP कैंप में शरण ले रखी है. जानकारी के मुताबिक अगले 48 घंटे तक वे वहीं ठहरेंगे. उत्तराखंड में रविवार को भी लगातार बारिश होने से मची तबाही से 8 व्यक्तियों की मौत हो गई. उत्तरकाशी तथा चमोली जिलों में भूस्खलन व बाढ़ से सड़कें व पुल ध्वस्त होने से चार धाम की यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई. देहरादून के प्रेमनगर थाने के प्रभारी विकास रावत ने बताया कि न्यू मीठी बेरी इलाके में एक मकान गिर जाने से एक ही परिवार के 3 व्यक्तियों की मौत हो गई. आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा केंथुरा ने बताया कि रुद्रपयाग जिले में भूस्खलन में 5 व्यक्तियों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हो गए. मीरा ने बताया कि मंदाकिनी और अलकनंदा तथा गंगा की सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. रुद्रप्रयाग व गौरीकुंड को जोड़ने वाला पुल क्षतिग्रस्त हो गया और उसे बंद कर दिया गया है. अधिकारी ने बताया कि खराब मौसम के कारण केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गयी है. गंगोत्री-यमुनोत्री जाने वाले हजारों श्रद्धालु फंस गए हैं, क्योंकि पीपलमंडी, बराकी एवं नालुपानी में भूस्खलन से मार्ग बंद कर दिए गए हैं. उत्तरकाशी जिले के होटलों और धर्मशालाओं में भी लोगों की भारी भीड़ है. चार धाम के यात्री वहां ठहरे हुए हैं. आपदा प्रबंधन व पुनर्वास मंत्री यशपाल आर्य ने बातया कि प्रशासन आपात स्थिति से निबटने के लिए चौकस है.

हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत

  हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत हो गई है। अगर आप हरिद्वार महाकुंभ Haridwar Kumbh में आने चाहते हैं तो आपको कोविड  (Covid-19)...