हरिद्वार के बाण इलाके में खुलेआम खनन हो रहा है। मौके की पड़ताल करने पर पता चला कि बाण गंगा से पत्थर और रेत उठाकर पहले तो स्टोक सेंटर पर पहुंचाया जाता है। स्टोक सेंटर से बाद में इस पत्थर और रेत को पास ही में चल रहे स्टोन क्रशर पर पहुंचा दिया जाता है। इस तरह से इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा है। अब आपको इस पूरे गोरखधंधे के बारे में तफ्शील से बताते हैं। कहने को तो बाण गंगा में खनन पर पूरी तरह से पाबंदी है। मगर इसके बावजूद भी खनन जारी है। स्टोन क्रशर पर भंडारण की अनुमति से ज्यादा सामान मौजूद है। प्रशासन छापेमारी करता है। स्टोन क्रशर पर जुर्माना भी लगाया जाता है। मगर इसके बाद भी ये स्टोन क्रशर बंद नहीं हुए हैं। अब भी बाण गंगा में खुलेआम क्रशर चल रहे हैं और ये क्रशर वाले खुलेआम ही बाण गंगा से पत्थर और रेत ट्रॉलियों और डंपर के जरिए मंगवा रहे हैं जो कि पूरी तरह से अवैध है। इलाके के गांव के लोग कुछ मुनाफे के चक्कर में अपनी बुग्गी और ट्रैक्टर ट्रॉली से गंगा से पत्थर और रेत भरकर पहले तो स्टोक सेंटर पर पहुंचाते हैं। स्टोक सेंटर वाले इनसे 13 से 16 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पत्थर और रेत खरीदते हैं। स्टोक सेंटर से ही सारा माल स्टोन क्रशर पर पहुंचाया जाता है। स्टोक सेंटर वाले स्टोन क्रशर से 22 से 25 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पत्थर और रेत खरीदते हैं। इतना ही नहीं अगर कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली वाला गंगा से पत्थर और रेत भरकर सीधे स्टोन क्रशर में पहुंचाना चाहे तो इसके लिए भी कोई मनाही नहीं है। गांव वालों की माने बाण गंगा में चल रहे है गणेश स्टोन पर तो खुलेआम बाण गंगा से खनन सामग्री आ रही है। इतना ही हीं नहीं इन्होंने बाण गंगा में अवैध रूप से काफी ज़मीन पर भी कब्जा कर लिया है। एक तरफ हरीश रावत सरकार अवैध खनन पर रोक लगाने का दावा करती है। मगर खननमाफिया पर किसी सरकारी फरमान का कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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