Wednesday, 11 July 2012

बहुगुणा की जीत

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के प्रकाश पंत को 39954 वोटों से हराकर सितारगंज उप चुनाव जीत लिया है। बहुगुणा सितारगंज विधानसभा उप चुनाव की मतगणना में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के उम्मीदवार प्रकाश पंत के खिलाफ शुरुआत से ही बढ़त बना रखी थी।

इससे पूर्व मतगणना के शुरुआती चरण में ही बहुगुणा ने करीब साढ़े सात हजार वोटों की बढ़त बना ली थी। अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण की मतगणना के बाद बहुगुणा को 8496 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी भाजपा के प्रकाश पंत को केवल 999 वोट मिले।

सितारगंज उप चुनाव आठ जुलाई को हुआ था। यह उपचुनाव मुख्यमंत्री के भाग्य का फैसला करेगा जिन्हें अपने पद पर बने रहने के लिये यह चुनाव जीतना जरूरी है। भाजपा के विधायक किरण मंडल द्वारा बहुगुणा के पक्ष में इस्तीफा दे देने के बाद यह उप चुनाव कराया गया।

Saturday, 7 July 2012

सितारगंज उपचुनाव



रविवार को मतदान
कुल पोलिंग बूथ 116
संवेदनशील पोलिंग बूथ 22
अतिसंवेदनशील पोलिंग बूथ 18
कड़ी चैकसी
तीन जोनल मजिस्टेªट, 12 सेक्टर मजिस्टेªट,
22 माइक्रो आब्जर्वर समेत 582 कर्मचारियों की तैनाती
पैरा मिलिट्री फोर्स की 4 कंपनियां
कुल मतदाता 91,156
पुरूष मतदाता 48,754
महिला मतदाता 42,402
मैदान में कुल 6 उम्मीदवार
कांग्रेस-बीजेपी में मुकाबला

मुंबई के सीएसटी स्टेशन से चोरी हुई बच्ची हरिद्वार से मिली।

मुंबई के सीएसटी स्टेशन से चोरी हुई बच्ची हरिद्वार से मिली।

मुंबई के सीएसटी स्टेशन से चुराई गई बच्ची हरिद्वार से मिल गई है। हरिद्वार पुलिस ने बच्ची को हरिद्वार रोड़वेज़ स्टेंड के बाहर से गिरफ्तार करने का दावा किया है। इस बच्ची को मुंबई के सीएसटी स्टेशन से एक चोर ने चुरा लिया था। चोरी की ये घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई। बच्ची चोरी की ये घटना 10 जून की है। बच्ची को चोरी करने वाले शख्सा का नाम राजू बताया जा रहा है। आरोपी ने कबूल कर लिया है कि उसने बच्ची को भीख मंगवाने के लिए चोरी किया था। मुंबई पुलिस ने एक दिन पहले ही सीसीटीवी फुटेज जारी किया था जिसमंे एक चोर को बच्ची को चुराकर ले जाते हुए दिखाया गया था। आज हरिद्वार पुलिस ने चोर को बच्ची समेत दबोच लिया है। पुलिस के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज देखकर ही बच्ची और चोर को पहचाना गया। अब सवाल ये है कि चोर बच्ची को धर्मनगरी लेकर क्यांे आया। हरिद्वार से चोर का क्या ताल्लुक है। सवाल इस बात का भी है कि कहीं उत्तराखंड में कोई बच्चा चोर गिरोह तो सक्रिय नहीं है। क्योंकि देहरादून, विकासनगर, श्रीनगर, बाजपुर, ऊधमसिंहनगर और हल्द्वानी समेत कई जगहों से बच्चे चोरी हो चुके है।

Sunday, 24 June 2012

मौन हो गई माही




गुड़गांव। सेना के जवानों ने 86 घंटे बाद मासूम माही को बोरवेल से बाहर निकाल लिया लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गई। गुड़गांव के सीएमओ ने माही को मृत घोषित किया। बोरवेल से निकलने के बाद माही को एंबुलेंस से गुड़गांव के ईएसआई अस्पताल में ले जाया गया जहा डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। माही को जैसे ही सेना के जवान लेकर ऊपर आए तुरंत ही माही को ईएसआई अस्पताल की पहले से मौजूद एंबुलेंस से उसे अस्पताल ले जाया गया। माही के साथ जाने वालों में सेना के जवान डाक्टर और उसकी मां भी शामिल है। माही के बाहर निकालने से पहले ही यहां के ईएसआई अस्पताल को हाईअलर्ट पर रखा गया था। चार वर्ष की माही बुधवार को साठ फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। अगले दिन से ही सेना और प्रशासन बच्ची को बोरवेल से निकालने में जुटा था। बोरवेल में गिरी माही तक पहुंचने में रुकावट बनी विशाल चंट्टान को तोड़ने में शनिवार रात करीब 12.30 बजे सैन्यकर्मियों को सफलता मिली। इस बीच बच्ची के शरीर में कोई हरकत न दिखने से राहत कार्य में लगे लोगों की धड़कनें तेज हो गई थी। शनिवार को सेना के साथ रैपिड मेट्रो एवं दिल्ली रेल मेट्रो कॉरपोरेशन के इंजीनियरों ने मोर्चा संभाला था। इसके बाद मेट्रो कर्मियों को सुरंग में उतारा गया। मेट्रो इंजीनियर माही तक पहुंचने के लिए आधुनिक संयंत्र, जीपीएस सहित अन्य तकनीक का उपयोग कर बच्ची की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में जुटे रहे। इससे पूर्व सेना के जवान सुरंग में चट्टान आने के कारण माही तक नहीं पहुंच पाए। उनका कहना था कि वे माही के करीब तक पहुंचे पर बीच में आए चट्टान को काटने में हुई दिक्कत से अधिक समय लगा। इस बीच, माही प्रकरण में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हरियाणा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कहा है कि सरकार इसका पता लगाए कि क्या यह घटना किसी लापरवाही का नतीजा है। राज्य के मुख्य सचिव को लिखे पत्र के माध्यम से आयोग ने यह जानना चाहा है कि इस केस में बोरवेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन हुआ कि नहीं। साथ ही यह भी जानना चाहा है कि राज्य सरकार ने बोरवेल को लेकर नियम कानून की अवहेलना करने वालों के खिलाफ में क्या कोई कार्रवाई की। आयोग ने राज्य सरकार से 70 फीट के बोरवेल खोदने व उसे खुला छोड़ देने के परिस्थितियों व तथ्यों पर भी रिपोर्ट तलब किया है। माही मामले से जुड़े बोरवेल व उसके भूमि मालिक और घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने राज्य सरकार से 10 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

Friday, 8 June 2012

अपनी अपनी सियासत चमकाने में लगी राजनीतिक पार्टियां

उत्तराखंड में राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी सियासत चमकाने में लगी हैं। कांग्रेस मंे बार बार हो रही कलह से बड़े नेता परेशान हैं तो बीजेपी को भी सत्ता से बेदखल होने के बाद जनता की याद सताने लगी है। बीजेपी अब मौजूदा सरकार की नाकामियां उजागर करने का दावा कर रही है। सरकार के काम काज पर पहले से ही कई तरह के सवाल उठते रहे हैं और अब विपक्षी पार्टी भी अपने तेवर दिखाने लगी है। बीजेपी नेता सरकार के तीन महीने के कार्यकाल को नाकाम बताने में जुटे हैं। ये बात अलग है कि पांच साल तक सत्ता में रही बीजेपी को कांग्रेस भी पूरी तरह फ्लाप बताती रही। चुनावों में भी बीजेपी को जनता ने सबक सिखाया था और सत्ता से बेदखल कर दिया था। उसके बाद से ही बीजेपी कांग्रेस की सरकार की नाकामियां गिनाने में लगी है। चाहे सितारगंज में सेंध लगाने का मुद्दा रहा हो या फिर राज्य के विकास से जुड़े मुद्दे बीजेपी सरकार को जमकर कोस रही है। हैरानी की बात ये है कि विरोधियों के तमाम सवालों के बाद भी सरकार की नींद नहीं खुल रही। बहरहाल राजनीतिक बयानबाजी का दौर भले ही जारी हो लेकिन असल मायनों में जनता तो आज भी विकास का इंतजार ही कर रही है। कई जगहों पर तो आम आदमी सड़क बिजली पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरस रहा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजनीतिक दल जनता के बारे में सोचते हैं या अपनी सियासी रोटियों के बारे में।

सरकार के दावे दमदार नहीं

सरकार के दावे दमदार नहीं
उत्तराखंड की सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भले ही तमाम तरह की योजनाएं चलाने के दावे करें लेकिन सरकार के ये दावे दमदार दिखाई नहीं दे रहे हैं। गंगोलीहाट इलाके के स्कूल टीचर्स की कमी से जूझ रहे हैं। इलाके के ज्यादातर स्कूलों की एक ही कहानी है। छात्र-छात्राओं के अनुपात में टीचरों की संख्या बेहद कम है। गंगोलीहाट और बेरीनाग के कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय है जहां पर एक-एक टीचर के सहारे ही स्कूल चलाया जा रहा है जबकि कुछ स्कूल तो टीचर बगैर सुने पड़े हैं। गंगोलीहाट और बेरीनाग ब्लाॅक में प्राथमिक विद्यालयों की कुल तादात 313 है। इन स्कूलों में टीचरों के डेढ सौ पद खाली पड़े हैं। जबकि इलाके में 67 जूनियर हाईस्कूूल हैं, जिनमें 40 जूनियर टीचर्स के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा 27 हाईस्कूलों में 135 पद खाली पड़े हैं। साथ ही 29 इंटर काॅलेजों में 103 प्रवक्ताओं के पद खाली है। आंकड़ों से साफ पता चलता है कि स्कूलों में पद तो हैं लेकिन इन्हें भरने के लिए सरकार की मंशा साफ नहीं लगती है। एक तरफ सूबे में पढ़े लिखे काबिल युवा नौकरी के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे है, उधर पद होते हुए भी इन्हें भरने में शिक्षा महकमा लाचार है।

हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत

  हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत हो गई है। अगर आप हरिद्वार महाकुंभ Haridwar Kumbh में आने चाहते हैं तो आपको कोविड  (Covid-19)...