Wednesday, 10 June 2015

म्यांमार और भारत का रिश्ता सदियों पुराना


एशिया का एक देश म्यांमार है। इसका भारतीय नाम 'ब्रह्मदेश' है और 1937 तक यह भारत का ही अंग था। पहले म्यांमार का नाम 'बर्मा' हुआ करता था, जो यहां बड़ी संख्या में आबाद बर्मी नस्ल के नाम पर पड़ा था। भारत के बौद्ध प्रचारकों के प्रयासों से यहां बौद्ध मत का विस्तार हुआ। उत्तर-पूर्वी एशिया के बड़े देशों में से एक म्यांमार पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां की 'वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स', शानदार स्मारक, असंख्य पगोडा, साफ-सुथरा और प्रदूषणमुक्त समुद्री तट, सुंदर बाग-बगीचे, लोगों की जीवनशैली, रमणीक पहाड़ी पर्यटन स्थल, जंगल, भव्य प्राचीन शहर और विस्मयकारी प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहे हैं। म्यांमार में लगभग प्रत्येक गांव में, जंगल में, मार्गों पर और प्रत्येक मुख्य पहाड़ी पर पगोडेे (स्तूप) मिलेंगे। इनमें से ज्यादातर धार्मिक व दानशील व्यक्तियों द्वारा बनवाए गए हैं। वहां विश्वास प्रचलित है कि इनके निर्माण से पुण्य की प्राप्ति होती है। म्यांमार के पगोडे प्राय: बहुभुज की बजाय गोलाकृति के होते हैं। उन्हें डगोवा अथवा चैत्य कहा जाता है। वहां का प्राचीनतम चैत्य पगान में वुपया में है। यह तीसरी शताब्दी में बना हुआ बताया जाता है। दसवीं शती में बना म्यिंगान प्रदेश का नगकडे नदाउंग पगोडा, सातवीं अथवा आठवीं शताब्दी में बना प्रोम का बाउबाउग्यी पगोडा, 1059 ई. में बना पगान का लोकानंद पगोडा तथा 15वीं सदी में बना सगैंग का तुपयोन पगोडा भी विख्यात हैं। स्वेदागोन पगोडा म्यांमार में सबसे अधिक महत्वपूर्ण पेगू के श्वेहमाउडू पगोडा और यंगून के स्वेदागोन पगोडा को माना जाता है। स्वेदागोन पगोडा सबसे अधिक प्रभावोत्पादक है। यह भव्य स्तूप बौद्ध मतावलम्बियों के लिए बहुत पवित्र स्थल है। जहां आकर लोग शांति महसूस करते हैं। कहा जाता है कि यह पहले केवल 27 फुट ऊंचा बनाया गया था और फिर 15वीं शती में इसे 323 फुट ऊंचा बना दिया गया। इसमें भगवान तथागत के आठ बाल और तीन अन्य बुद्धों के पवित्र अवशेष स्थापित बताए जाते हैं। स्वेदागोन पगोडा म्यांमार का प्रसिद्ध बौद्ध मठ है, जिसका शाब्दिक अर्थ स्वर्ण शिवालय होता है। हालांकि म्यांमार के मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक असली स्वेदागोन खाक में मिल चुका है। स्वेदागोन पगोडा का निर्माण मोन ने बागान काल में करवाया था। इसमें मौजूद रंगबिरंगे स्तूपों में हर एक के बीच में 99 मीटर का दायरा है। सोने के आवरण से ढका मुख्य स्तूप इस मठ की भव्यता में चार-चांद लगाता है। शुरुआती दौर में भारत और म्यांमार के बीच कोई राजनीतिक सम्बन्ध नहीं था। यद्यपि म्यांमार उस काल में भी हिन्दू संस्कृति से इतना अधिक प्रभावित था कि इसके नगरों के नाम, जैसे- 'अयथिया' अथवा 'अयोध्या' संस्कृतनामों पर रखे जाने लगे थे। बाद में अशोक के काल में बौद्ध मत और संस्कृति का म्यांमार में इतना अधिक प्रसार हुआ कि आज भी यहां के बहुसंख्यक बौद्ध मतावलम्बी हैं। पर्यटन के लिए अनुपम म्यांमार में कई पुरातात्विक स्थल हैं और पूरे देश में विभिन्न रंगारंग त्योहारों का आयोजन वर्ष भर होता रहता है। यहां 'एडवेंचर' के शौकीनों से लेकर धर्म, संस्कृति, प्रकृति और पुरातात्विक स्मारकों के प्रति रूझान रखने वाले सभी के लिए ढेर सारी सौगातें हैं। म्यांमार के उत्तर में चीन, पश्चिम में भारत, बंलादेश और हिन्द महासागर तथा दक्षिण-पूर्व की दिशा में इंडोनेशिया स्थित है। यंगून : यह म्यांमार का सबसे बड़ा शहर है और म्यांमार की पुरानी राजधानी रह चुका है। शहर में कई बड़े-बड़े बाग-बगीचे होने के कारण इसे 'गार्डन सिटी ऑफ ईस्ट' भी कहा जाता है। यंगून में ही विश्व प्रसिद्ध 'गोल्डन पगोडा' है। मांडले : इस शहर को 'सिटी ऑफ जेम्स' भी कह जाता है। यहां साहित्य और कई पारंपरिक कलाएं समृद्ध हुई हैं। म्यांमार का सबसे बड़ा सांस्कृतिक केन्द्र मांडले शहर और आसपास अनेक पर्यटक स्थल हैं। हमिंगन बेल : वैसे तो यह इलाका काफी छोटा है लेकिन इसकी प्रसिद्धि इसलिए है कि यहां के एक उपासना स्थल पर दुनिया का सबसे बड़ा घंटा है। बागान : यहां के भव्य स्मारक म्यांमार के शासकों की धर्मनिष्ठता और प्रतिभा को दर्शाते हैं। यहां अनेक पगोडे हैं। आनंद और थाबिन्यू मंदिर देखने लायक है। बागान ऐसी जगह है जहां आपको कला के अद्भुत नजारे देखने को मिलेंगे। ताउन्ग्यी : यह गर्मियों की सैरगाह है और धीरे-धीरे पर्यटन केन्द्र के रूप में उभरा है। लोग यहां प्राकृतिक सुंदर और सुखद ठंडक का आनंद उठाने आते हैं। ताउन्ग्यी के पास ही इन्ले झील है जो पर्यटकों का मन मोह लेती है। नीले पहाड़ों से घिरी इन्ले झील तैरते द्वीपों पर बाग-बगीचों और तैरते गांवों के लिए जानी जाती है। यहां के रंगबिरंगे तैरते बाजार आकर्षण का केन्द्र हैं। ल्ल म्यांमार यहां वीजा लेकर यात्रा होती है। राजधानी- नेपितॉ सबसे बड़ा शहर यांगून, पहले इसको रंगून कहा जाता था। मुख्य हवाई अड्डा-यांगून 

श्रीनगर के देवप्रयाग में सड़क हादसे, 6 की मौत


श्रीनगरः देवप्रयाग मुल्यागांव के पास सड़क हादसा खाई में गिरी कार, 4 की मौत, 1 घायल ऋषिकेश से चमोली जा रहे थे कार सवार घायल को 108 की मदद से बेस हॉस्पिटल पहुंचाया श्रीनगरः देवप्रयाग के साकणीधार में सड़क हादसा खाई में गिरी कार, 2 लोगों की मौत पौड़ी से देहरादून जा रहे थे कार सवार

Monday, 8 June 2015

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की वित्त मंत्री से दिल्ली में मुलाकात


सीएम हरीश रावत ने दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की। सीएम ने इस मुलाकात के दौरान वित्त मंत्री से सामने कई मुद्दों पर बातचीत की। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार अर्द्धकुंभ के लिए बजट का मसला वित्त मंत्री से सामने रखा। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है इसलिए केंद्र सरकार को उनकी भरपूर मदद करनी चाहिए। इसके अलावा कई और अहम मसलों पर भी बातचीत हुई।

Sunday, 7 June 2015

सीएम हरीश के आने पर क्यों शांत हुए स्वामी शिवानंद ?


हरिद्वार में खनन के ख़िलाफ़ अनशन पर बैठे स्वामी शिवानंद का अनशन सीएम हरीश रावत के आने के बाद भले ही टूट गया हो। मगर अब शिवानंद के अनशन और बाण गंगा इलाके में वैध और अवैध खनन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे पहले तो यही सवाल है कि सीएम हरीश के आने के बाद आखिरकार स्वामी शिवानंद के सुर कमज़ोर क्यों पड़े नज़र आए। अब तक सरकार और प्रशासन के ख़िलाफ़ खुले तौर पर बिगुल बजाने वाले स्वामी शिवानंद मीडिया के सवालों से कन्नी काटते और सरकार का बचाव करते क्यों नज़र आए। वैध और अवैध खनन का ये खेल भले ही आम आदमी की समझ से परे हो मगर स्वामी शिवानंद अब तक इस पूरे गोरखधंधे को अच्छी तरह से जान चुके हैं इसलिए वो भी सरकार शासनादेश का ही हवाला देकर बात करते नज़र आए। आज जाने ऐसा क्यों लगा की शिवानंद मीडिया के सवालों का उलझन भरे तरीके से जवाब दे रहे थे। ऐसा लगा कि स्वामी शिवानंद मीडिया से कुछ छिपाकर बात कर रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लगा कि सीएम के साथ हुई उनकी बात और मीडिया से मुखातिब होते हुए कुछ अंतर था। सीएम के आने के बाद भी तो शिवानंद को आश्वासन ही मिला है। सीएम हरीश रावत ने उनसे कहा कि गंगा में वैध और अवैध खनन को लेकर बात की गई है। और भविष्य में जो भी फैसला लिया जाएगा उनसे लिए सहमति ली जाएगी। ये सब बातों तो सीएम हरीश रावत पहले भी कह चुके हैं। फिर स्वामी शिवानंद क्या इस बात के इंतज़ार में थे कि जब तक मुख्यमंत्री उनके दरबार में तशरीफ नहीं लाते हैं अनशन जारी रहेगा। शिवानंद अब से पहले भी कई बार अनशन कर चुके हैं। उनका अनशन कई बार इसी तरह के आश्वासन के बाद तुड़वाया भी जा चुका है। जब भी शिवानंद अनशन तोड़ते थे तो उसके बाद भी उनकी सुर नरम नहीं रहते थे। अनशन तोड़ने के बाद भी स्वामी शिवानंद खुले तौर पर चेतावनी देते थे कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। मगर मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस बार मातृ सदन आने के बाद स्वामी शिवानंद का गुस्सा तो जैसे शांत ही हो गया है।

शिवानंद का अनशन ख़त्म, झुकी प्रदेश सरकार


हरिद्वार में मातृ सदन के अध्यक्ष स्वामी शिवानंद का अनशन ख़त्म हो गया है। सीएम हरीश रावत शिवानंद को समझाने के लिए हरिद्वार पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि सीएम के आश्वासन के बाद शिवानंद अनशन ख़त्म करने पर राजी हुए। साथ ही शिवानंद ने चेतावनी दी है कि अगर गंगा में फिर से अवैध खनन हुआ तो अनशन पर बैठ जाएंगे। बाण गंगा में अवैध खनन को लेकर स्वामी शिवानंद कई दिन से अनशन पर थे। स्वामी शिवानंद की मांग थी कि जब तक गंगा में खनन बंद नहीं होता है वे अनशन पर रहेंगे। इससे पहले भी शिवानंद कई बार अनशन कर चुके हैं। उनके अनशन के आगे सरकार तो कई बार झुकी भी। मगर अवैध खनन नहीं रुका। जाहिर है इस बार भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है अब अवैध खनन पर रोक लग ही जाएगी।

Friday, 5 June 2015

योग- व्यायाम शिक्षकों की होगी भर्ती


देहरादून। सूबे के योग और बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों के लिए राहत की खबर है। विभाग शीघ्र बीपीएड शिक्षकों के साथ ही योग प्रशिक्षितों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। अपर मुख्य सचिव एस राजू ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। प्रदेश में बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों की रिक्त पदों पर भर्ती परीक्षा के माध्यम से होगी। इसके अलावा कुछ स्थानों पर व्यायाम शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी। बताया जा रहा है कि जागेश्वर (अल्मोड़ा), ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में योग शिक्षकों को नियुक्ति दी जा सकती है। शासन ने भर्ती प्रक्रिया के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। शिक्षा सचिव एमसी जोशी ने कहा कि योग और व्यायाम शिक्षकों की भर्ती होनी है। यह कितने पदों पर होगी, अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। हालांकि, सूत्रों की माने तो बीपीएड के लगभग 900 पदों पर व्यायाम शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है।

बीएड में ऑनलाइन आवेदन


देहरादून। सत्र 2015-16 में बीएड करने के इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने पहली बार बीएड प्रवेश परीक्षा में ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की व्यवस्था की है। अभ्यर्थी 22 जून से 11 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। दो अगस्त को गढ़वाल मंडल के सात जनपदों के 12 केंद्रों में प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी।

Monday, 1 June 2015

हेमकुंड साहिब के कपाट खुल गए


सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट खुल गए हैं... हज़ारों लोगों ने पहली अरदास में भाग लिया.. रविवार को सीएम हरीश रावत ने श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया था.. 10 अक्टूबर 2015 तक हेमकुंड साहिब के दर्शन किए जा सकेंगे.. कपाट खुलने के साथ ही अरदास का सिलसिला शुरू हो गया है.. यात्रा को आसान बनाने के लिए तमाम इंतजामात कर लिए गए हैं.. साल 2016 से रीठा साहिब और नानकमत्ता को भी इस यात्रा से जोड़े जाने की योजना है.. इस बार भक्तों को यात्रा पूरी करने के लिए चार किलोमीटर कम चलना पड़ेगा.. गोविंदघाट से पुलना के बीच मोटर मार्ग बनाया गया है.. हेमकुंड साहिब जानेवाले श्रद्धालु अब पुलना तक गाड़ियां ले जा सकेंगे.. जिससे 22 किलोमीटर लंबी यात्रा अब 18 किलोमीटर की रह गई है..

Sunday, 31 May 2015

हेमकुंड साहिब के लिए पहला जत्था रवाना, सीएम ने किया रवाना


हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए यात्रियों के पहला जत्था रवाना हो गया है। सीएम हरीश रावत ने जत्थे को रवाना किया। एक जून से हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरु होने जा रही है। हेमकुंड साहिब यात्रा को लेकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर दी है। कपाट खुलने की यात्रा में शामिल होने के लिए छह हजार से अधिक सिख यात्री गोविंदघाट व जोशीमठ पहुंच चुके हैं। कपाट खुलने से पहले ही एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं का जत्था हेमकुंड साहिब जाकर पवित्र सरोवर में स्नान कर लौट भी चुका है। मकुंड साहिब में 55 कार्यकर्ता गुरुद्वारे में तैनात हो चुके हैं। इन कार्यकर्ताओं ने लंगर भी शुरू कर दिया गया है। हेमकुंड सरोवर में हालांकि अभी भी बर्फ जमी है, लेकिन बर्फ हटाकर पवित्र सरोवर में स्नान शुरू हो गया है। कार्यकर्ताओं ने गुरुद्वारे व लक्ष्मण मंदिर से भी बर्फ हटा दी है। हेमकुंड साहिब यात्रा के बेस कैंप घांघरिया में भी 230 कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया है। यहां भी लंगर शुरू हो चुका है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक सेवा सिंह का कहना है कि 31 मई को गोविंदघाट से शुरू होने वाली यात्रा में शामिल होने के लिए चार हजार सिक्ख यात्री जहां गोविंदघाट पहुंच चुके हैं, वहीं दो हजार से अधिक सिख यात्री जोशीमठ पहुंच चुके हैं। -

Saturday, 30 May 2015

उत्तराखंड में लोग मरते रहे और अधिकारी करते रहे मौज-मस्ती


जून 2013 में जब उत्तराखंड भीषण आपदा से जूझ रहा था, केदारघाटी में लाशों के ढेर लगे थे, जान बचाने का संघर्ष चल रहा था और लोग भूख-प्यास से बिलबिला रहे थे। उस समय राहत एवं बचाव में लगे अधिकारी महंगे होटलों में रात गुजार भोजन में लजीज व्यंजन (चिकन-मटन-अंडे, मटर पनीर व गुलाब जामुन) का स्वाद ले रहे थे। सूचना के अधिकारी की एक अपील की सुनवाई में यह सब सामने आया। सूचना आयोग में प्रस्तुत आपदा के दौरान के राहत-बचाव कार्यों के बिल इसकी गवाही दे रहे हैं। यह देख सूचना आयोग अवाक रह गया। मामले के सामने आ जाने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जांच के आदेश दे दिए हैं। राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने आपदा के कार्यों में सैकड़ों करोड़ रुपये के घपले की आशंका जताते हुए सभी कार्यों की सीबीआइ या किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराने की गुजारिश मुख्यमंत्री से की थी। नेशनल एक्शन फोरम फॉर सोशल जस्टिस के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र कुमार ने 27 दिसंबर, 2013 को रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ व बागेश्वर के जिलाधिकारियों से जून 2013 में आई आपदा के दौरान राहत-बचाव के सभी कार्यों में व्यय धनराशि और इसमें जुटे अधिकारियों के खर्च की जानकारी मांगी थी। तय समयावधि में समुचित जानकारी न मिलने पर भूपेंद्र कुमार ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग की सख्ती के बाद जब जनपदों ने बिल देने शुरू किए तो मामले की सुनवाई कर रहे सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा अवाक रह गए। केदारघाटी की त्रासदी वाले रुद्रप्रयाग जनपद के ही एक मामले के बिल पर गौर करें तो आपदा की जिस घड़ी में लोगों के सिर पर छत नहीं थी और लोगों को पर्याप्त भोजन भी मयस्सर नहीं हो पा रहा था, उस दौरान राहत-बचाव कार्य में लगे कार्मिकों के ठहरने व खाने की व्यवस्था पर 25 लाख 19 हजार रुपये का खर्च आया। एक अधिकारी के होटल में ठहरने का जो किराया दर्शाया गया, वह 6750 रुपये था। भोजन मिलाकर यह राशि प्रतिदिन 7650 रुपये बैठ रही थी। चौंकाने वाली बात यह भी कि उस दौरान अधिकारियों ने आधा लीटर दूध की 194 रुपये कीमत अदा की। अपेक्षाकृत कम प्रभावित पिथौरागढ़, बागेश्वर जनपद में कुमाऊं मंडल विकास निगम ने 15 दिन आपदा प्रभावितों के सरकारी रेस्ट हाउस में ठहरने का चार लाख रुपये का बिल भेजा है। कई कार्य ऐसे हैं, जिन्हें आपदा से पहले ही पूरा दिखाया गया। जबकि, कुछ बिल आपदा वाले दिन के ही हैं। आपदा के दौरान अधिकारियों ने मोटरसाइकिल व स्कूटर में भी डीजल भर डाला। इस तरह की बिलों में तमाम अनियमितता मिलीं, जिस पर आयोग को संज्ञान लेकर सूचना आयोग को सीबीआइ जांच कराने की गुजारिश करनी पड़ी। उत्तराखंड के राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि 'आपदा राहत में लगे कार्मिकों के खाने-पीने व ठहरने के बिल मानवता को शर्मसार करने वाले हैं। ये कार्मिक आपदा पीड़ितों की मदद और दायित्व निर्वहन के लिए गए थे या पिकनिक मनाने।' पिथौरागढ़ जनपद में अधिशासी अभियंता, जल संस्थान डीडीहाट ने एक कार्य को 28 दिसंबर 2013 को शुरू होना दिखाया, जबकि बिल में कार्य पूर्ण होने की तिथि 43 दिन पहले 16 नवंबर 2013 दिखाई गई। एक अन्य बिल में राहत कार्य आपदा से छह माह पहले 22 जनवरी 2013 को ही शुरू करना दर्शाया गया। नगर पंचायत डीडीहाट के 30 लाख 45 हजार रुपये के कार्यों के बिलों में कोई तिथि अंकित नहीं मिली। तहसीलदार कपकोट द्वारा 12 लाख रुपये आपदा पीड़ितों को बांटना दिखाया है, जबकि रसीद एकमात्र पीड़िता को पांच हजार रुपये भुगतान की लगाई गई। तहसीलदार गरुड़ ने आपदा राहत के एक लाख 83 हजार 962 रुपये बांटे और यहां भी रेकार्ड के तौर पर 1188, 816 रुपये की ही रसीद मिली। 16 जून 2013 को आई आपदा की भयावहता का पता प्रशासन को दो-तीन दिन बाद ही चल पाया था, लेकिन उत्तरकाशी में खाने-पीने आदि की सामग्री के लाखों रुपये के बिल 16 तारीख के ही लगा दिए गए। आपदा के समय मोटरसाइकिल (यूए072935), (यूए07ए/0881), (यूके05ए-0840), बजाज चेतक (यूए12/0310) में क्रमश: 30, 25, 15, 30 लीटर डीजल डालना दिखाया गया। थ्री व्हीलर (यूके08टीए/0844) व ए/एफ नंबर के एक वाहन में क्रमश: 30-30 लीटर डीजल डालने के बिल भी अधिकारियों ने संलग्न किए। बता दें कि पर्वतीय जिलों में थ्री व्हीलर चलते ही नहीं हैं। उपजिलाधिकारी के नाम से बनाए गए बिलों पर बिना नंबर के वाहनों में 21 जून से 09 जुलाई के मध्य क्रमश: 51795, 49329, 21733 रुपये के डीजल खर्च होना दिखाया गया। तहसील कर्णप्रयाग में राहत कार्य के तहत आपदा से करीब डेढ़ माह पहले के ईंधन बिल लगाए गए। चमोली के जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी ने आपदा से एक माह पहले के होटल बिल लगा दिए। डेक्कन हेलीकॉप्टर सेवा ने 24 जून की तारीख का जो बिल जमा किया है, उसमें ईंधन का चार दिन का खर्च 98 लाख 8090 रुपये दर्शाया गया है।

उत्तराखंड में जून 2013 की आपदा के दौरान मची थी लूट


देहरादून, जून 2013 में जब उत्तराखंड भीषण आपदा से जूझ रहा था, केदारघाटी में लाशों के ढेर लगे थे, जान बचाने का संघर्ष चल रहा था और लोग भूख-प्यास से बिलबिला रहे थे। उस समय राहत एवं बचाव में लगे अधिकारी महंगे होटलों में रात गुजार भोजन में लजीज व्यंजन (चिकन-मटन-अंडे, मटर पनीर व गुलाब जामुन) का स्वाद ले रहे थे। सूचना के अधिकारी की एक अपील की सुनवाई में यह सब सामने आया। सूचना आयोग में प्रस्तुत आपदा के दौरान के राहत-बचाव कार्यों के बिल इसकी गवाही दे रहे हैं। यह देख सूचना आयोग अवाक रह गया। मामले के सामने आ जाने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जांच के आदेश दे दिए हैं। राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने आपदा के कार्यों में सैकड़ों करोड़ रुपये के घपले की आशंका जताते हुए सभी कार्यों की सीबीआइ या किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराने की गुजारिश मुख्यमंत्री से की थी।

Friday, 29 May 2015

हरिद्वार में विधायक कुंवर प्रणव सिंह और खनन माफिया के बीच फ़ायरिंग


हरिद्वार में बाण गंगा इलाके में खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव सिंह और खनन माफिया के बीच फ़ायरिंग हुई है। बताया जा रहा है कि ये फ़ायरिंग बिशनपुर कुंडी इलाके मेंं हुई है। खनन माफिया और विधायक के समर्थकों के बीच करीब दो सौ राउंड फायरिंग हुई है। बताया जा रहा है कि विधायक कुंडी इलाके में गंगा पर बने बांध का निरीक्षण करने के लिए सिंचाई विभाग के कर्मचारियों के साथ गए थे। इसी दौरान विधायक के समर्थकों पर खनन माफिया ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में विधायक के समर्थकों की तरफ से भी फ़ायरिंग की गई है। जानकारी के बाद हरिद्वार से पुलिस टीम मौके के लिए रवाना हुई। एसएसपी स्वीटी अग्रवाल खुद मौके का मुआयना करने पहुंची।

रामदेव के भाई रामभरत को भेजा गया जेल


हरिद्वार के एक गांव में हुई हिंसा के मामले में योगगुरु रामदेव के भाई रामभरत को जेल भेज दिया गया है. रामभरत को बुधवार रात जुडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. दरअसल, बाबा रामदेव के हरिद्वार स्थि‍त पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क में बुधवार को फैक्ट्री कर्मचारियों और ट्रक यूनियन के सदस्यों के बीच जबरदस्त झड़प हो गई थी. इस घटना में 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जबकि फायरिंग में एक शख्स की मौत हो गई थी. इसी मामले में पुलिस ने रामदेव के छोटे भाई रामभरत को गिरफ्तार किया था. पुलिस रामदेव के भाई रामभरत को पूछताछ के लिए कनखल थाने ले गई थी. पुलिस ने पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क से तीन राइफल भी जब्त कीं. iv

माधुरी दीक्षित को नोटिस


मैगी का विज्ञापन करने पर सुप्रसिद्घ अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को हरिद्वार के खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नोटिस भेजा गया है। नोटिस में विज्ञापन करने वाले दावों की रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही 15 दिन में जवाब नहीं देने पर एडीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने की चेेतावनी दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशों पर नेस्ले कंपनी के प्रोडक्ट मैगी पर कार्रवाई जारी है। हरिद्वार के खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मैगी का विज्ञापन करने वाली अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को नोटिस भेजकर सात बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी ने नोटिस में जवाब मांगा है कि मैगी हेल्थ को मजेदार कैसी बनाती है। किस रिसर्च रिपोर्ट, लेबोरेट्री, वैज्ञानिक के आधार पर दावे किए हैं। कब विज्ञापन किया था और विज्ञापन वाले अनुबंध की प्रति भी मांगी गई है। साथ ही पूछा गया है कि विज्ञापन बनाने के लिए कितनी धनराशि प्राप्त हुई और अनुबंध कितने दिनों का है। उन्होंने बताया कि नोटिस में चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन में जवाब नहीं दिया तो एकतरफा कार्रवाई करते हुए एडीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। मैगी के दो सैंपल भरे, तीन को नोटिस जिला खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने रानीपुर मोड़ पर स्थित विशाल मेगा मार्ट में बेचने के लिए रखे नेस्ले की मैगी के दो सैंपल लिए हैं। विभाग के तहसील रुड़की अधिकारी दिलीप जैन ने बताया कि सैंपल में मैगी टू मिनट मसाला, नूडल और मैगी वेज आटा नूडल के सैंपल भरे गए हैं, जिन्हें जांच के लिए रुद्रपुर लैब भेजा गया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी ने बताया कि सैंपल भरने के अलावा विशाल मेगा मार्ट प्रबंधक, सप्लायर राधे कृष्णा ट्रेडिंग कंपनी, निर्माता कपंनी नेस्ले प्लांट पंतनगर को भी नोटिस भेजकर 15 दिन में जवाब मांगा गया है।

Thursday, 28 May 2015

पैसे मांगे तो कांस्टेबल पर फायर


देहरादून: बुधवार देर रात सब्जी मंडी में शराब के नशे में दो सिपाहियों समेत चार युवकों ने पुलिसिया हनक दिखाई और दुकानदारों पर रौब गालिब किया। सिगरेट के पैसे मांगने पर तो इन्होंने एक दुकानदार की जान तक लेने का प्रयास किया। युवकों ने दुकानदार पर फायर झोंक दिए। दोनली बंदूक से आरोपियों ने एक के बाद एक चार फायर किए। गनीमत रही कि दुकानदार बाल-बाल बच गया। घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने चारों को हिरासत में ले लिया। घटनास्थल से पुलिस ने कारतूस के खोखे भी बरामद किए। देर रात तक युवकों से पूछताछ जारी थी। आरोपियों में एक मंडी का आढ़ती व उसका मुंशी बताए जा रहे हैं। जबकि, दोनों कांस्टेबल आढ़ती के भाई हैं। बंदूक इनमें से एक के नाम रजिस्टर्ड बताई जा रही है।1मंडी में देर रात तक खाने व चाय की कुछ दुकानें खुली रहती हैं। जिनमें मंडी और आसपास के प्रतिष्ठानों में देर रात तक काम करने वाले लोग आते-जाते रहते हैं। इन दुकानों में चाय, सिगरेट आदि की दुकान जगमोहन शर्मा की भी है। जानकारी के अनुसार बुधवार रात करीब साढ़े दस बजे बिना नंबर की स्विफ्ट कार में चार युवक वहां आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवकों ने बेहद शराब पी हुई थी। इनमें से एक ने जगमोहन से सिगरेट मांगी, लेकिन जगमोहन ने पहले के उधार के पैसे मांगने चाहे। इस पर एक ने कार से दोनली बंदूक निकाली और दुकानदार पर फायर झोंक दिया। साथियों ने उसे पकड़ा तो उसने दूसरा फायर भी झोंक दिया। इतने में वह कार की तरफ दौड़ा तो लगा कि मामला शांत हो गया। लेकिन, कार से उसने फिर एक के बाद एक दो फायर कर डाले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर कार को कब्जे में ले लिया है।1एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि आरोपियों में गौरव व प्रिंस स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस में कांस्टेबल हैं और इन दिनों हरिद्वार में उनकी तैनाती है। जबकि दो अन्य आरोपियों में चंदन सिंह मंडी का आढ़ती और अक्षय उसका मुंशी है। उन्होंने बताया कि दोनली बंदूक कांस्टेबल गौरव के नाम रजिस्टर्ड है।संवाद सहयोगी, देहरादून: बुधवार देर रात सब्जी मंडी में शराब के नशे में दो सिपाहियों समेत चार युवकों ने पुलिसिया हनक दिखाई और दुकानदारों पर रौब गालिब किया। सिगरेट के पैसे मांगने पर तो इन्होंने एक दुकानदार की जान तक लेने का प्रयास किया। युवकों ने दुकानदार पर फायर झोंक दिए। दोनली बंदूक से आरोपियों ने एक के बाद एक चार फायर किए। गनीमत रही कि दुकानदार बाल-बाल बच गया। घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

हरिद्वार में प्रशासन की मिलीभगत के बाण गंगा में खनन


हरिद्वार के बाण इलाके में खुलेआम खनन हो रहा है। मौके की पड़ताल करने पर पता चला कि बाण गंगा से पत्थर और रेत उठाकर पहले तो स्टोक सेंटर पर पहुंचाया जाता है। स्टोक सेंटर से बाद में इस पत्थर और रेत को पास ही में चल रहे स्टोन क्रशर पर पहुंचा दिया जाता है। इस तरह से इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा है। अब आपको इस पूरे गोरखधंधे के बारे में तफ्शील से बताते हैं। कहने को तो बाण गंगा में खनन पर पूरी तरह से पाबंदी है। मगर इसके बावजूद भी खनन जारी है। स्टोन क्रशर पर भंडारण की अनुमति से ज्यादा सामान मौजूद है। प्रशासन छापेमारी करता है। स्टोन क्रशर पर जुर्माना भी लगाया जाता है। मगर इसके बाद भी ये स्टोन क्रशर बंद नहीं हुए हैं। अब भी बाण गंगा में खुलेआम क्रशर चल रहे हैं और ये क्रशर वाले खुलेआम ही बाण गंगा से पत्थर और रेत ट्रॉलियों और डंपर के जरिए मंगवा रहे हैं जो कि पूरी तरह से अवैध है। इलाके के गांव के लोग कुछ मुनाफे के चक्कर में अपनी बुग्गी और ट्रैक्टर ट्रॉली से गंगा से पत्थर और रेत भरकर पहले तो स्टोक सेंटर पर पहुंचाते हैं। स्टोक सेंटर वाले इनसे 13 से 16 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पत्थर और रेत खरीदते हैं। स्टोक सेंटर से ही सारा माल स्टोन क्रशर पर पहुंचाया जाता है। स्टोक सेंटर वाले स्टोन क्रशर से 22 से 25 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पत्थर और रेत खरीदते हैं। इतना ही नहीं अगर कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली वाला गंगा से पत्थर और रेत भरकर सीधे स्टोन क्रशर में पहुंचाना चाहे तो इसके लिए भी कोई मनाही नहीं है। गांव वालों की माने बाण गंगा में चल रहे है गणेश स्टोन पर तो खुलेआम बाण गंगा से खनन सामग्री आ रही है। इतना ही हीं नहीं इन्होंने बाण गंगा में अवैध रूप से काफी ज़मीन पर भी कब्जा कर लिया है। एक तरफ हरीश रावत सरकार अवैध खनन पर रोक लगाने का दावा करती है। मगर खननमाफिया पर किसी सरकारी फरमान का कोई फर्क नहीं पड़ता है।

बाबा रामदेव के फूड पार्क के बाहर बवाल, एक की मौत


योग गुरु बाबा रामदेव से जुड़े प्रतिष्ठान पतंजलि हर्बल एंड फूड पार्क के उत्पादों की ढुलाई के ठेके को लेकर पार्क सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय ट्रक यूनियन के सदस्यों के बीच बुधवार को जमकर बवाल हुआ। लाठी-डंडे और पथराव के साथ ही फायरिंग में ट्रक यूनियन के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि दस लोग घायल हो गए। सुरक्षा कर्मियों पर धारदार हथियार से भी हमला करने का आरोप यूनियन पदाधिकारियों ने लगाया। पुलिस ने बाबा रामदेव के भाई राम भरत सहित चार सुरक्षा गाडरें को हिरासत में लिया है। फूड पार्क का प्रबंधन राम भरत के पास है।

हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत

  हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत हो गई है। अगर आप हरिद्वार महाकुंभ Haridwar Kumbh में आने चाहते हैं तो आपको कोविड  (Covid-19)...