हरिद्वार में खनन के ख़िलाफ़ अनशन पर बैठे स्वामी शिवानंद का अनशन सीएम हरीश रावत के आने के बाद भले ही टूट गया हो। मगर अब शिवानंद के अनशन और बाण गंगा इलाके में वैध और अवैध खनन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे पहले तो यही सवाल है कि सीएम हरीश के आने के बाद आखिरकार स्वामी शिवानंद के सुर कमज़ोर क्यों पड़े नज़र आए। अब तक सरकार और प्रशासन के ख़िलाफ़ खुले तौर पर बिगुल बजाने वाले स्वामी शिवानंद मीडिया के सवालों से कन्नी काटते और सरकार का बचाव करते क्यों नज़र आए। वैध और अवैध खनन का ये खेल भले ही आम आदमी की समझ से परे हो मगर स्वामी शिवानंद अब तक इस पूरे गोरखधंधे को अच्छी तरह से जान चुके हैं इसलिए वो भी सरकार शासनादेश का ही हवाला देकर बात करते नज़र आए। आज जाने ऐसा क्यों लगा की शिवानंद मीडिया के सवालों का उलझन भरे तरीके से जवाब दे रहे थे। ऐसा लगा कि स्वामी शिवानंद मीडिया से कुछ छिपाकर बात कर रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लगा कि सीएम के साथ हुई उनकी बात और मीडिया से मुखातिब होते हुए कुछ अंतर था। सीएम के आने के बाद भी तो शिवानंद को आश्वासन ही मिला है। सीएम हरीश रावत ने उनसे कहा कि गंगा में वैध और अवैध खनन को लेकर बात की गई है। और भविष्य में जो भी फैसला लिया जाएगा उनसे लिए सहमति ली जाएगी। ये सब बातों तो सीएम हरीश रावत पहले भी कह चुके हैं। फिर स्वामी शिवानंद क्या इस बात के इंतज़ार में थे कि जब तक मुख्यमंत्री उनके दरबार में तशरीफ नहीं लाते हैं अनशन जारी रहेगा। शिवानंद अब से पहले भी कई बार अनशन कर चुके हैं। उनका अनशन कई बार इसी तरह के आश्वासन के बाद तुड़वाया भी जा चुका है। जब भी शिवानंद अनशन तोड़ते थे तो उसके बाद भी उनकी सुर नरम नहीं रहते थे। अनशन तोड़ने के बाद भी स्वामी शिवानंद खुले तौर पर चेतावनी देते थे कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। मगर मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस बार मातृ सदन आने के बाद स्वामी शिवानंद का गुस्सा तो जैसे शांत ही हो गया है।

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