चिदंबरम को राहत
नई दिल्लीः गृह मंत्री पी चिदंबरम और सरकार को दिल्ली की निचली अदालत से फौरी राहत मिल गई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने चिदंबरम को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सह आरोपी बनाने से इंकार करते हुए जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी। शनिवार दोपहर करीब 1.35 बजे कोर्ट ने ये आदेश सुनाया। कोर्ट ने 64 पन्नों के आदेश में माना है कि प्रथम दृष्टया पी. चिदंबरम के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित होता हो कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उनकी कोई भूमिका रही है। स्वामी ने फैसले के तुरंत बाद कहा कि वे इस निर्णय से हैरान हैं। लेकिन विचलित नहीं। विशेष कोर्ट के फैसले को वह दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। विशेष जज ओपी सैनी ने अपने फैसले में कहा कहा कि याचिकाकर्ता ने चिदंबरम पर दो आरोप लगाए हैं। पहला चिदंबरम ने 2001 के मूल्य पर स्पेक्ट्रम आवंटन की बात कही थी और दूसरा स्वॉन टेलीकॉम और यूनिटेक को इक्विटी बेचने को कहा था, लेकिन इस बारे में ऐसा कोई सुबूत रिकार्ड पर नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि इन दोनों ही कार्य के लिए चिदंबरम ने कहीं से भी आर्थिक फायदा लिया हो। कोर्ट ने कहा कि 31 अक्टूबर 2003 में कैबिनेट की जो बैठक स्पेक्ट्रम आवंटन और मूल्य निर्धारण करने के लिए हुई थी उसके बाद वित्त मंत्री ने निर्णय लेते हुए ए.राजा से सन 2001 के मूल्य के आधार पर स्पेक्ट्रम लाइसेंस की बिक्री करने को कहा था। लेकिन इसके बाद से तत्कालीन दूर संचार मंत्री राजा, इस बारे में बात करने के लिए दोबारा तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के पास नहीं गए। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में जो शामिल थे उन पर सीबीआइ द्वारा सुबूतों के आधार पर विशेष कोर्ट में पहले से ही मुकदमा चल रहा है। अदालत ने कहा कि चिदंबरम के लोक सेवक होने के नाते उन्होंने जो फैसले लिए उसमें कहीं से भी आपराधिक षड़यंत्र का आभास नहीं होता है और न ही इससे चिदंबरम की किसी भी मामले में कोई बदनियती नजर आती है। किसी भी दस्तावेजों से कोर्ट को यह नहीं पता चला कि राजा के साथ मिलकर चिदंबरम ने खुद को आर्थिक फायदा पहुंचाया हो या अपने किसी परिचित और जानकार को।
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