Wednesday, 10 June 2015

म्यांमार और भारत का रिश्ता सदियों पुराना


एशिया का एक देश म्यांमार है। इसका भारतीय नाम 'ब्रह्मदेश' है और 1937 तक यह भारत का ही अंग था। पहले म्यांमार का नाम 'बर्मा' हुआ करता था, जो यहां बड़ी संख्या में आबाद बर्मी नस्ल के नाम पर पड़ा था। भारत के बौद्ध प्रचारकों के प्रयासों से यहां बौद्ध मत का विस्तार हुआ। उत्तर-पूर्वी एशिया के बड़े देशों में से एक म्यांमार पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां की 'वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स', शानदार स्मारक, असंख्य पगोडा, साफ-सुथरा और प्रदूषणमुक्त समुद्री तट, सुंदर बाग-बगीचे, लोगों की जीवनशैली, रमणीक पहाड़ी पर्यटन स्थल, जंगल, भव्य प्राचीन शहर और विस्मयकारी प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहे हैं। म्यांमार में लगभग प्रत्येक गांव में, जंगल में, मार्गों पर और प्रत्येक मुख्य पहाड़ी पर पगोडेे (स्तूप) मिलेंगे। इनमें से ज्यादातर धार्मिक व दानशील व्यक्तियों द्वारा बनवाए गए हैं। वहां विश्वास प्रचलित है कि इनके निर्माण से पुण्य की प्राप्ति होती है। म्यांमार के पगोडे प्राय: बहुभुज की बजाय गोलाकृति के होते हैं। उन्हें डगोवा अथवा चैत्य कहा जाता है। वहां का प्राचीनतम चैत्य पगान में वुपया में है। यह तीसरी शताब्दी में बना हुआ बताया जाता है। दसवीं शती में बना म्यिंगान प्रदेश का नगकडे नदाउंग पगोडा, सातवीं अथवा आठवीं शताब्दी में बना प्रोम का बाउबाउग्यी पगोडा, 1059 ई. में बना पगान का लोकानंद पगोडा तथा 15वीं सदी में बना सगैंग का तुपयोन पगोडा भी विख्यात हैं। स्वेदागोन पगोडा म्यांमार में सबसे अधिक महत्वपूर्ण पेगू के श्वेहमाउडू पगोडा और यंगून के स्वेदागोन पगोडा को माना जाता है। स्वेदागोन पगोडा सबसे अधिक प्रभावोत्पादक है। यह भव्य स्तूप बौद्ध मतावलम्बियों के लिए बहुत पवित्र स्थल है। जहां आकर लोग शांति महसूस करते हैं। कहा जाता है कि यह पहले केवल 27 फुट ऊंचा बनाया गया था और फिर 15वीं शती में इसे 323 फुट ऊंचा बना दिया गया। इसमें भगवान तथागत के आठ बाल और तीन अन्य बुद्धों के पवित्र अवशेष स्थापित बताए जाते हैं। स्वेदागोन पगोडा म्यांमार का प्रसिद्ध बौद्ध मठ है, जिसका शाब्दिक अर्थ स्वर्ण शिवालय होता है। हालांकि म्यांमार के मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक असली स्वेदागोन खाक में मिल चुका है। स्वेदागोन पगोडा का निर्माण मोन ने बागान काल में करवाया था। इसमें मौजूद रंगबिरंगे स्तूपों में हर एक के बीच में 99 मीटर का दायरा है। सोने के आवरण से ढका मुख्य स्तूप इस मठ की भव्यता में चार-चांद लगाता है। शुरुआती दौर में भारत और म्यांमार के बीच कोई राजनीतिक सम्बन्ध नहीं था। यद्यपि म्यांमार उस काल में भी हिन्दू संस्कृति से इतना अधिक प्रभावित था कि इसके नगरों के नाम, जैसे- 'अयथिया' अथवा 'अयोध्या' संस्कृतनामों पर रखे जाने लगे थे। बाद में अशोक के काल में बौद्ध मत और संस्कृति का म्यांमार में इतना अधिक प्रसार हुआ कि आज भी यहां के बहुसंख्यक बौद्ध मतावलम्बी हैं। पर्यटन के लिए अनुपम म्यांमार में कई पुरातात्विक स्थल हैं और पूरे देश में विभिन्न रंगारंग त्योहारों का आयोजन वर्ष भर होता रहता है। यहां 'एडवेंचर' के शौकीनों से लेकर धर्म, संस्कृति, प्रकृति और पुरातात्विक स्मारकों के प्रति रूझान रखने वाले सभी के लिए ढेर सारी सौगातें हैं। म्यांमार के उत्तर में चीन, पश्चिम में भारत, बंलादेश और हिन्द महासागर तथा दक्षिण-पूर्व की दिशा में इंडोनेशिया स्थित है। यंगून : यह म्यांमार का सबसे बड़ा शहर है और म्यांमार की पुरानी राजधानी रह चुका है। शहर में कई बड़े-बड़े बाग-बगीचे होने के कारण इसे 'गार्डन सिटी ऑफ ईस्ट' भी कहा जाता है। यंगून में ही विश्व प्रसिद्ध 'गोल्डन पगोडा' है। मांडले : इस शहर को 'सिटी ऑफ जेम्स' भी कह जाता है। यहां साहित्य और कई पारंपरिक कलाएं समृद्ध हुई हैं। म्यांमार का सबसे बड़ा सांस्कृतिक केन्द्र मांडले शहर और आसपास अनेक पर्यटक स्थल हैं। हमिंगन बेल : वैसे तो यह इलाका काफी छोटा है लेकिन इसकी प्रसिद्धि इसलिए है कि यहां के एक उपासना स्थल पर दुनिया का सबसे बड़ा घंटा है। बागान : यहां के भव्य स्मारक म्यांमार के शासकों की धर्मनिष्ठता और प्रतिभा को दर्शाते हैं। यहां अनेक पगोडे हैं। आनंद और थाबिन्यू मंदिर देखने लायक है। बागान ऐसी जगह है जहां आपको कला के अद्भुत नजारे देखने को मिलेंगे। ताउन्ग्यी : यह गर्मियों की सैरगाह है और धीरे-धीरे पर्यटन केन्द्र के रूप में उभरा है। लोग यहां प्राकृतिक सुंदर और सुखद ठंडक का आनंद उठाने आते हैं। ताउन्ग्यी के पास ही इन्ले झील है जो पर्यटकों का मन मोह लेती है। नीले पहाड़ों से घिरी इन्ले झील तैरते द्वीपों पर बाग-बगीचों और तैरते गांवों के लिए जानी जाती है। यहां के रंगबिरंगे तैरते बाजार आकर्षण का केन्द्र हैं। ल्ल म्यांमार यहां वीजा लेकर यात्रा होती है। राजधानी- नेपितॉ सबसे बड़ा शहर यांगून, पहले इसको रंगून कहा जाता था। मुख्य हवाई अड्डा-यांगून 

श्रीनगर के देवप्रयाग में सड़क हादसे, 6 की मौत


श्रीनगरः देवप्रयाग मुल्यागांव के पास सड़क हादसा खाई में गिरी कार, 4 की मौत, 1 घायल ऋषिकेश से चमोली जा रहे थे कार सवार घायल को 108 की मदद से बेस हॉस्पिटल पहुंचाया श्रीनगरः देवप्रयाग के साकणीधार में सड़क हादसा खाई में गिरी कार, 2 लोगों की मौत पौड़ी से देहरादून जा रहे थे कार सवार

Monday, 8 June 2015

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की वित्त मंत्री से दिल्ली में मुलाकात


सीएम हरीश रावत ने दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की। सीएम ने इस मुलाकात के दौरान वित्त मंत्री से सामने कई मुद्दों पर बातचीत की। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार अर्द्धकुंभ के लिए बजट का मसला वित्त मंत्री से सामने रखा। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है इसलिए केंद्र सरकार को उनकी भरपूर मदद करनी चाहिए। इसके अलावा कई और अहम मसलों पर भी बातचीत हुई।

Sunday, 7 June 2015

सीएम हरीश के आने पर क्यों शांत हुए स्वामी शिवानंद ?


हरिद्वार में खनन के ख़िलाफ़ अनशन पर बैठे स्वामी शिवानंद का अनशन सीएम हरीश रावत के आने के बाद भले ही टूट गया हो। मगर अब शिवानंद के अनशन और बाण गंगा इलाके में वैध और अवैध खनन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे पहले तो यही सवाल है कि सीएम हरीश के आने के बाद आखिरकार स्वामी शिवानंद के सुर कमज़ोर क्यों पड़े नज़र आए। अब तक सरकार और प्रशासन के ख़िलाफ़ खुले तौर पर बिगुल बजाने वाले स्वामी शिवानंद मीडिया के सवालों से कन्नी काटते और सरकार का बचाव करते क्यों नज़र आए। वैध और अवैध खनन का ये खेल भले ही आम आदमी की समझ से परे हो मगर स्वामी शिवानंद अब तक इस पूरे गोरखधंधे को अच्छी तरह से जान चुके हैं इसलिए वो भी सरकार शासनादेश का ही हवाला देकर बात करते नज़र आए। आज जाने ऐसा क्यों लगा की शिवानंद मीडिया के सवालों का उलझन भरे तरीके से जवाब दे रहे थे। ऐसा लगा कि स्वामी शिवानंद मीडिया से कुछ छिपाकर बात कर रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लगा कि सीएम के साथ हुई उनकी बात और मीडिया से मुखातिब होते हुए कुछ अंतर था। सीएम के आने के बाद भी तो शिवानंद को आश्वासन ही मिला है। सीएम हरीश रावत ने उनसे कहा कि गंगा में वैध और अवैध खनन को लेकर बात की गई है। और भविष्य में जो भी फैसला लिया जाएगा उनसे लिए सहमति ली जाएगी। ये सब बातों तो सीएम हरीश रावत पहले भी कह चुके हैं। फिर स्वामी शिवानंद क्या इस बात के इंतज़ार में थे कि जब तक मुख्यमंत्री उनके दरबार में तशरीफ नहीं लाते हैं अनशन जारी रहेगा। शिवानंद अब से पहले भी कई बार अनशन कर चुके हैं। उनका अनशन कई बार इसी तरह के आश्वासन के बाद तुड़वाया भी जा चुका है। जब भी शिवानंद अनशन तोड़ते थे तो उसके बाद भी उनकी सुर नरम नहीं रहते थे। अनशन तोड़ने के बाद भी स्वामी शिवानंद खुले तौर पर चेतावनी देते थे कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो फिर से आंदोलन किया जाएगा। मगर मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस बार मातृ सदन आने के बाद स्वामी शिवानंद का गुस्सा तो जैसे शांत ही हो गया है।

शिवानंद का अनशन ख़त्म, झुकी प्रदेश सरकार


हरिद्वार में मातृ सदन के अध्यक्ष स्वामी शिवानंद का अनशन ख़त्म हो गया है। सीएम हरीश रावत शिवानंद को समझाने के लिए हरिद्वार पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि सीएम के आश्वासन के बाद शिवानंद अनशन ख़त्म करने पर राजी हुए। साथ ही शिवानंद ने चेतावनी दी है कि अगर गंगा में फिर से अवैध खनन हुआ तो अनशन पर बैठ जाएंगे। बाण गंगा में अवैध खनन को लेकर स्वामी शिवानंद कई दिन से अनशन पर थे। स्वामी शिवानंद की मांग थी कि जब तक गंगा में खनन बंद नहीं होता है वे अनशन पर रहेंगे। इससे पहले भी शिवानंद कई बार अनशन कर चुके हैं। उनके अनशन के आगे सरकार तो कई बार झुकी भी। मगर अवैध खनन नहीं रुका। जाहिर है इस बार भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है अब अवैध खनन पर रोक लग ही जाएगी।

Friday, 5 June 2015

योग- व्यायाम शिक्षकों की होगी भर्ती


देहरादून। सूबे के योग और बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों के लिए राहत की खबर है। विभाग शीघ्र बीपीएड शिक्षकों के साथ ही योग प्रशिक्षितों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। अपर मुख्य सचिव एस राजू ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। प्रदेश में बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों की रिक्त पदों पर भर्ती परीक्षा के माध्यम से होगी। इसके अलावा कुछ स्थानों पर व्यायाम शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी। बताया जा रहा है कि जागेश्वर (अल्मोड़ा), ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में योग शिक्षकों को नियुक्ति दी जा सकती है। शासन ने भर्ती प्रक्रिया के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। शिक्षा सचिव एमसी जोशी ने कहा कि योग और व्यायाम शिक्षकों की भर्ती होनी है। यह कितने पदों पर होगी, अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। हालांकि, सूत्रों की माने तो बीपीएड के लगभग 900 पदों पर व्यायाम शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है।

बीएड में ऑनलाइन आवेदन


देहरादून। सत्र 2015-16 में बीएड करने के इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने पहली बार बीएड प्रवेश परीक्षा में ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की व्यवस्था की है। अभ्यर्थी 22 जून से 11 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। दो अगस्त को गढ़वाल मंडल के सात जनपदों के 12 केंद्रों में प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी।

Monday, 1 June 2015

हेमकुंड साहिब के कपाट खुल गए


सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट खुल गए हैं... हज़ारों लोगों ने पहली अरदास में भाग लिया.. रविवार को सीएम हरीश रावत ने श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया था.. 10 अक्टूबर 2015 तक हेमकुंड साहिब के दर्शन किए जा सकेंगे.. कपाट खुलने के साथ ही अरदास का सिलसिला शुरू हो गया है.. यात्रा को आसान बनाने के लिए तमाम इंतजामात कर लिए गए हैं.. साल 2016 से रीठा साहिब और नानकमत्ता को भी इस यात्रा से जोड़े जाने की योजना है.. इस बार भक्तों को यात्रा पूरी करने के लिए चार किलोमीटर कम चलना पड़ेगा.. गोविंदघाट से पुलना के बीच मोटर मार्ग बनाया गया है.. हेमकुंड साहिब जानेवाले श्रद्धालु अब पुलना तक गाड़ियां ले जा सकेंगे.. जिससे 22 किलोमीटर लंबी यात्रा अब 18 किलोमीटर की रह गई है..

हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत

  हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत हो गई है। अगर आप हरिद्वार महाकुंभ Haridwar Kumbh में आने चाहते हैं तो आपको कोविड  (Covid-19)...