Saturday, 15 September 2012

उजड गया ऊखीमठ


रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ की दर्दभरी दास्तां.....


जिस जगह पर कभी हरे जंगल हुआ करते थे अब उसने विराने की शक्त इख्तियार कर ली है। जहां कभी खेतों में फसल लहलहाती थी वहां अब खतरा ही खतरा है। जिन घरों में कभी खुशियों की किलकारी सुनाई देती थी आज वहां मातम ही मातम है।
रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में अचानक आई आपदा में पलभर में सब कुछ ज़मींदोज हो गया। चारों तरफ बिखरा ये मलबा ऊखीमठ में आई कुदरती आपदा की कहानी बयां कर रहा है। रास्ते, खेत खलियान, मकान और इनसान इस आपदा की भेंट चढ़ गए। ऊखीमठ को जोड़ने वाले ज्यादातर संपर्क मार्गों का नामो निशान मिट चुका है। सेना और आईटीबीपी के जवान शुक्रवार से ही राहत बचाव काम में जुटे हुए है। लेकिन रास्तों के तबाह हो जाने से राहत बचाव काम में काफी दिक्कतें आ रही हैं। आसमान से आफत बनकर बरसे बेरहम बादलों ने इलाकों में काफी तबाही मचाई है। पहाड़ों का मलबा मकानों में आ घुसा। जिस किसी को बच निकलने का मौका मिला वो भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा है लेकिन कुछ इतनी खुशनसीब नहीं थे। मकान के अंदर मलबे को साफ कर लापता लोगों तलाश की जा रही है। आपदा का कहर झेल रहे लोग काफी डरे और सहमें हुए हैं। घऱ खेत, पुल, सड़कें और संपर्क मार्ग सब खत्म हो चुके हैं। जिन लोगों की छत छिन गई है वो दूसरों के यहां शरण लिए हुए है। लोग शासन प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं। सरकार आपदा की इस खड़ी में आपदा पीडि़तों के साथ खडी दिखाई दे रही है। सीएम बहुगुणा ने फौरान राहत बचाव के निर्देश जारी कर दिए। सीएम खुद आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा पीडि़तों को मदद पहुंचाने में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। आपदा की भेंट ब्राहमण खोली में एक अखबार के पत्रकार पर भी पड़ी। इनका हंसता खेलता परिवार पलभर में आपदा की भेंट चढ़ गया। परिवार में दो बेटे, पत्नी और मां आपदा की भेंट चढ़ गए। कभी अपनी कलम से पहाड़ की आवाम का दर्द लिखने वाले दिनेश आज खुद अपनी कहानी बयां करने की हालत में नहीं हैं। गुरूवार की रात जब लोग गहरी नींद में सोए हुए थे। तभी अचानक ज़ोर की आवाज सुनाई दी। कुछ ही देर बाद हर तरफ पहाड़ का मलबा और पानी के नाले बहने लगे। लोग अपनी जाने बचाने के लिए चिंखते चिल्लाते रहे लेकिन अंधेरा होने की वजह से वक्त पर मदद नहीं पहुंच पाई। सुबह होते ही हर तरफ बर्बादी की तस्वीरें दिखाई दे रही थी।

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