Friday, 21 September 2012
बीजेपी का कंडारी कांड ?
बीजेपी का कंडारी कांड ?
मातबर सिंह कंडारी बीजेपी से बागी होकर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उपचुनाव से पहले इसे बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पांच साल तक सत्ता में रहे मातबर सिंह कंडारी विधानसभा चुनाव की हार नहीं पचा पाए हैं। साथ ही उन्हें सत्ता का मोह भी सता रहा है। शायद इसीलिए वो कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि बीजेपी के कई और नेता भी उनके संपर्क में हैं जो कांग्रेस में आना चाहते हैं। वहीं कंडारी ने बीजेपी पर अपनी अनदेखी का आरोप लगाया है। पहले टिहरी उपचुनाव में उन्हें दरकिनार किया गया और फिर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री वीरेंद्र सिंह बिष्ट को बीजेपी में शामिल करने के मसले पर भी उनकी राय नहीं ली गई। इसी बात से आहत होकर कंडारी ने कांग्रेस का दामन थामा है। वहीं बीजेपी नेताओं ने कंडारी को अवसरवादी करार दिया है।
साकेत बहुगुणा ने भरा नामांकन
कांग्रेस उम्मीदवार साकेत बहुगुणा ने टिहरी उपचुनाव के लिए नामांकन कर दिया है। साकेत के साथ सीएम विजय बहुगुणा के अलावा कई कांग्रेसी नेता मौजूद थे। टिहरी संसदीय सीट के लिए 10 अक्टूबर को मतदान होना है। बीजेपी ने माहरानी राज्य लक्ष्मी को अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि कांग्रेस की तरफ से सीएम विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा मैदान में हैं। साकेत के नामांकन के साथ ही बहुगुणा परिवार की तीसरी पीढ़ी भी राजनीति के मैदान में आ गई है।
Tuesday, 18 September 2012
मातबर ने क्यों तोड़ा बीजेपी से नाता ?
उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने बीजेपी को अलविदा कह दिया है। कंडारी ने अपना इस्तीफा दे दिया है। कंडारी बीजेपी ने नाराज चल रहे थे। उनकी ये नाराजगी उस वक्त शुरू हुई जब टिहरी लोकसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने 10 नामों की लिस्ट बीजेपी आलाकमान के पास भेजी थी। कंडारी को इस बात की नाराजगी थी कि 10 के पैनल में उनका नाम पहले नंबर पर क्यों नहीं रखा गया था। वहीं अब मातबर सिंह कंडारी ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है। कंडारी का राजनीति से काफी नाता रहा है। टिहरी लोकसभा उपचुनाव सिर पर है, ऐसे में बीजेपी से कंडारी का जाना चुनाव के लिहाज से सही नहीं है।
Saturday, 15 September 2012
उजड गया ऊखीमठ
रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ की दर्दभरी दास्तां.....
जिस जगह पर कभी हरे जंगल हुआ करते थे अब उसने विराने की शक्त इख्तियार कर ली है। जहां कभी खेतों में फसल लहलहाती थी वहां अब खतरा ही खतरा है। जिन घरों में कभी खुशियों की किलकारी सुनाई देती थी आज वहां मातम ही मातम है।
रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में अचानक आई आपदा में पलभर में सब कुछ ज़मींदोज हो गया। चारों तरफ बिखरा ये मलबा ऊखीमठ में आई कुदरती आपदा की कहानी बयां कर रहा है। रास्ते, खेत खलियान, मकान और इनसान इस आपदा की भेंट चढ़ गए। ऊखीमठ को जोड़ने वाले ज्यादातर संपर्क मार्गों का नामो निशान मिट चुका है। सेना और आईटीबीपी के जवान शुक्रवार से ही राहत बचाव काम में जुटे हुए है। लेकिन रास्तों के तबाह हो जाने से राहत बचाव काम में काफी दिक्कतें आ रही हैं। आसमान से आफत बनकर बरसे बेरहम बादलों ने इलाकों में काफी तबाही मचाई है। पहाड़ों का मलबा मकानों में आ घुसा। जिस किसी को बच निकलने का मौका मिला वो भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा है लेकिन कुछ इतनी खुशनसीब नहीं थे। मकान के अंदर मलबे को साफ कर लापता लोगों तलाश की जा रही है। आपदा का कहर झेल रहे लोग काफी डरे और सहमें हुए हैं। घऱ खेत, पुल, सड़कें और संपर्क मार्ग सब खत्म हो चुके हैं। जिन लोगों की छत छिन गई है वो दूसरों के यहां शरण लिए हुए है। लोग शासन प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं। सरकार आपदा की इस खड़ी में आपदा पीडि़तों के साथ खडी दिखाई दे रही है। सीएम बहुगुणा ने फौरान राहत बचाव के निर्देश जारी कर दिए। सीएम खुद आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा पीडि़तों को मदद पहुंचाने में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। आपदा की भेंट ब्राहमण खोली में एक अखबार के पत्रकार पर भी पड़ी। इनका हंसता खेलता परिवार पलभर में आपदा की भेंट चढ़ गया। परिवार में दो बेटे, पत्नी और मां आपदा की भेंट चढ़ गए। कभी अपनी कलम से पहाड़ की आवाम का दर्द लिखने वाले दिनेश आज खुद अपनी कहानी बयां करने की हालत में नहीं हैं। गुरूवार की रात जब लोग गहरी नींद में सोए हुए थे। तभी अचानक ज़ोर की आवाज सुनाई दी। कुछ ही देर बाद हर तरफ पहाड़ का मलबा और पानी के नाले बहने लगे। लोग अपनी जाने बचाने के लिए चिंखते चिल्लाते रहे लेकिन अंधेरा होने की वजह से वक्त पर मदद नहीं पहुंच पाई। सुबह होते ही हर तरफ बर्बादी की तस्वीरें दिखाई दे रही थी।
Friday, 14 September 2012
कुल कितनी मौतें ?
रुद्रप्रयाग इलाके में हुई तबाही में कुल कितनी मौतें हुई है ये अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है। राहत और बचाव काम के लिए सेना और आईटीबीपी लगी हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के आंकडों पर गौर करें तो आपदा में कुल 22 लोगों की जान गई है, करीब 15 लोग घायल है। जबकि 45 लोग लापता बताए जा रहे है। आपदा प्रबंधन विभाग की मानें 8 आवासीय मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए है। कुल 22 लोगों के मरने की पुष्टि आपदा प्रबंधन विभाग ने की है। इनमें किमाणा गांव से 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि गिरिया गांव से 3, संसारी गांव से 3, मंगोली गांव से 2, चुन्नी गांव से 4 और प्रेमनगर गांव से कुल 5 लोगों मरने की पुष्टि की गई है। कुल लापता 45 लोगों में से सबसे ज्यादा लोग किमाणा गांव के है। अकेले इस गांव से 20 लोग लापता है। जबकि दस लोग मंगोली गांव से और 10 लोग चुन्नी गांव से लापता है। ये आंकड़ा आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से जारी किए गए है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें सेना और आईटीबीपी के साथ राहत बचाव काम में लगी हुई है। सेना और आईटीबीपी की कुल 120 जवान लोगें की तलाश में जुटे हुए है। इसके अलावा घायलों की खोजबीन के लिए एक हेलीकाप्टर मुहैया कराया गया है।
बर्बादी बनकर बरसे बादल, ऊखीमठ में तबाही, 60 लोगों के मरने की खबर, 20 की सरकार ने की पुष्टि
रुद्रप्रयाग- पहाड़ी इलाकों में कुदरत का कहर लगातार जारी है। रुद्रप्रयाग के उखीमठ में बादल फटन से भारी तबाही हुई है। अब तक 60 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 19 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। आपदा प्रभावित इलाकों में सड़कें, पुल और पैदल रास्ते पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जिससे राहत बचाव काम में काफी दिक्कत आ रही है। सीएम बहुगुणा ने घटना पर दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में सरकार आपदा पीडि़तों के साथ है। सीएम ने कहा कि राहत काम के लिए सेना और आईटीबपी को लगाया गया है। साथ ही उन्होंने 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मौसम साफ रहा तो वो शुक्रवार को आपदा प्रभावित इलाकों को दौरा करेंगे। उत्तराखंड में आपदा ने फिर से दस्तक दी है, रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में बादल फटने से भारी तबाही मची है। मंगोली, भट्टवारी, पाली, फंपज, चुन्नी, किमारा, खोली समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं। बादल फटने से कई मकान जमींदोज हो गए हैं। अब तक जो जानकारी मिल पाई है उसके मुताबिक 60 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि दर्जनों लोग अभी भी घायल है।
Subscribe to:
Comments (Atom)
हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत
हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh 2021) की शुरुआत हो गई है। अगर आप हरिद्वार महाकुंभ Haridwar Kumbh में आने चाहते हैं तो आपको कोविड (Covid-19)...






